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सरिता के साथ अन्याय से खफा हिमाचली मुक्केबाज

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एशियन गेम्स में भारतीय महिला बॉक्सर सरिता के साथ हुए अन्याय से हिमाचली मुक्केबाज भी आहत हैं। उनके मुताबिक इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए थी। उन्होंने सरिता के साथ हुई बेइंसाफी के खिलाफ आईओएस की ओर से आवाज न उठाए जाने पर भी दुख जताया। साथ ही कहा कि यदि एसोसिएशन चाहती तो निर्धारित समय के भीतर आपत्ति दर्ज करवाकर सरिता को न्याय दिलवा सकती थी।
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साथ ही सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुकाबलों में बॉक्सिंग रिंग में पसीना बहाने के बाद जब खिलाड़ी को खुद ही अपनी लड़ाई लड़नी है तो इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) की क्या जरूरत है? भारतीय महिला बॉक्सर सरिता के साथ गई ऑफिशियल टीम ने भी उस मुकाबले को देखा होगा। यह भी मालूम होगा कि सरिता के साथ गलत हुआ है। फिर वह क्यों सरिता को न्याय नहीं दिला पाए? आईओए को नियमों में आपत्ति दर्ज करवाने को आधे घंटे के भीतर तय 500 डॉलर की राशि का इंतजाम कर सरिता को न्याय दिलाना चाहिए था।

शिमला में चल रही पुरुषों की बॉक्सिंग प्रतियोगिता और खेल परिसर में चल रहे कोचिंग कैंप में शामिल बॉक्सरों ने इस ताजा मामले पर अमर उजाला से बात की। बॉक्सरों ने भी खुलकर अपने दिल की बात रखी और सरिता के दर्द को महसूस किया।
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सरिता नहीं जानती थीं विरोध के नियम

आईओए सरिता के साथ हुई बेइंसाफी पर चुप रही। इससे मजबूरन उन्हें अपने ढंग से फैसले का विरोध करना पड़ा। संभवतया उन्हें अंतरराष्ट्रीय नियमों की जानकारी नहीं थी। इस कारण गलत फैसले के विरोध में मेडल को पहनने से मना कर दिया। इसमें ऑफिशियल की गलती है। सरिता ने सिर्फ अपनी समझ के मुताबिक अपना विरोध दर्ज कर न्याय मांगा था।
- अमन, 56 केजी भार वर्ग खिलाड़ी

गलत फैसला आने पर सरिता अकेली पड़ गईं। उनके पास निर्धारित आधे घंटे के भीतर आपत्ति दर्ज करवाने को जरूरी राशि तक नहीं थी। उन्होंने नियमों की अनदेखी जरूर की है, मगर यदि ऑफिशियल समय रहते आपत्ति दर्ज करवाते तो यह नौबत नहीं आती। खिलाड़ी को नियमों की जानकारी नहीं थी। आईओए को सरिता के लिए लड़ना चाहिए था।
- अंकित 54 किलोग्राम
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सरिता के साथ गलत हुआ

सरिता को अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में बेहतर प्रदर्शन का फल नहीं मिला। गलत निर्णय पर सरिता के विरोध का तरीका भले गलत हो, मगर वह कहीं न कहीं अपनी आवाज उठाने में सफल रही हैं। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी तो इसके लिए आईओए जिम्मेदार है। एसोसिएशन चाहती तो उसकी विरोध को नियमों के दायरे में उठाकर न्याय दिलवा सकती थी।
- मीना 63-66 केजी भार वर्ग, रामपुर बुशहर, गर्ल्ज स्कूल

भारतीय बॉक्सरों से होता रहा है पक्षपात
भारतीय बॉक्सरों के साथ अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में ऐसा पक्षपात होता रहा है। बावजूद इसके टीम को लेकर जाने वाले ऑफिशियल और अधिकारी उनके हितों की रक्षा करने में नाकाम रहते है। सरिता ने भले ही मेडल वापस कर नियम तोड़े, मगर इसके लिए आईओए जिम्मेदार है। ऑफिशियल चाहते तो नियमों में विरोध दर्ज कर उन्हें न्याय दिलवा सकते थे।
- सुरेखा, 63 केजी, रोहड़ू चौहारा
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