सियासी शीतयुद्ध का केंद्र बिंदु बन चुके धर्मशाला के केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू) के कैंपस को जमीन पर उतारने के लिए हिमाचल सरकार ने कवायद तेज कर दी है। इसके तहत वन विभाग की संस्तुति के बाद प्रदेश सरकार ने केंद्रीय वन मंत्रालय से सीयू के लिए देहरा में चयनित कैंपस की भूमि की यूजर एजेंसी केंद्रीय विश्वविद्यालय को बनाने की सिफारिश कर दी है। अब केंद्र की मंजूरी के बाद निदेशक उच्च शिक्षा से बदलकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के यूजर एजेंसी बनने के बाद केंद्रीय बजट से मिलने वाली राशि से कैंपस का निर्माण शुरू हो जाएगा। पीसीसीएफ हॉफ डॉ. सविता ने सरकार को संस्तुति किए जाने की पुष्टि की है।
दरअसल, साल 2018 में इस सीयू के देहरा स्थित कैंपस की जमीन की एफसीए क्लीयरेंस मिल गई थी लेकिन इसका काम शुरू नहीं हो सका। हाल ही में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कैंपस को लेकर अभियान शुरू करने के बाद केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर और जयराम सरकार के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई थी। अनुराग ने जहां परोक्ष रूप से प्रदेश सरकार को सीयू को लेकर गंभीर होने की बात कही थी, वहीं प्रदेश सरकार की ओर से राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने मोर्चा संभालते हुए लंबा बयान जारी कर परोक्ष रूप से केंद्र सरकार पर ही देरी का ठीकरा फोड़ दिया था। बहरहाल, विवाद के बीच अब प्रदेश सरकार ने मंथन कर यूजर एजेंसी बदलने की कवायद शुरू कर दी। इसके साथ ही सीयू के धर्मशाला के पास स्थित जदरांगल में प्रस्तावित दूसरे कैंपस को लेकर भी केंद्र से संपर्क साध लिया है।
सीयू को लेकर जयराम सरकार गंभीर
वन मंत्री राकेश पठानिया ने कहा कि प्रदेश सरकार सीयू को लेकर बेहद संवेदनशील है। यूजर एजेंसी बदलते ही कैंपस निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। पिछली सरकार ने सियासी नफा नुकसान के चक्कर में सीयू के कैंपस को फुटबाल बनाकर रख दिया था। प्रदेश सरकार दूसरे कैंपस की क्लीयरेंस के साथ ही कैंपस निर्माण को लेकर मौजूद हर अवरोध को दूर करने का प्रयास कर रही है।