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प्राकृतिक खेती के लिए याद रहेंगे आचार्य देवव्रत, ये सीख भी दी

Tue, 16 Jul 2019 11:15 AM IST
Krishan Singh प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला
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आचार्य देवव्रत(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश के 27 वें राज्यपाल के रूप में आचार्य देवव्रत ने कई ऐसे काम किए जिनकी बदौलत उन्होंने प्रदेश व देश में नया मुकाम हासिल किया। बतौर राज्यपाल उन्होंने पूरे कार्यकाल के दौरान छह बिंदुओं पर फोकस रखा और उनके अनुसार ही काम किया। चाहे प्राकृतिक खेती हो या फिर जल संरक्षण एवं साक्षरता का विषय, आचार्य देवव्रत ने हर उस मुद्दे पर काम किया जिसका सीधे तौर पर आम लोगों से जुड़ाव था। उनकी मेहनत और प्रयासों का ही नतीजा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यपालों के सम्मेलन में उनके प्रयासों की सराहना करते हुए उनके जैसा काम करने की सलाह दी थी। अब हिमाचल में शुरू किए इन्हीं प्रयासों को देवव्रत गुजरात में आगे बढ़ाएंगे।

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हिमाचल में कार्यभार संभालने के बाद आचार्य देवव्रत ने स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण, नशा निवारण, जल संरक्षण एवं साक्षरता, समरसता, प्राकृतिक कृषि एवं गोपालन और बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ के छह बिंदुओं पर काम किया। गुरुकुल कुरुक्षेत्र में किए प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए प्राकृतिक खेती के प्रति प्रदेश के किसानों-बागवानाें को प्रोत्साहित किया जिसके चलते वर्तमान में करीब तीन हजार से ज्यादा किसान बागवान इस पद्धति से कृषि बागवानी कर रहे हैं। यही नहीं प्रदेश सरकार ने भी इस प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 25 करोड़ का बजट में प्रावधान किया। गोपालन व देशी नस्ल की गायों को बढ़ावा दिया तो सरकार ने भी उसे पालने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन की व्यवस्था की।

हिमाचल में जल संरक्षण के लिए उन्होंने सार्थक प्रयास शुरू करते हुए दो बार वाटर मैन आफ इंडिया व मैग्सैसे अवार्ड विजेता राजेंद्र सिंह के साथ मिलकर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दो बार बैठकें कीं। छुआछूत को खत्म करने के लिए उन्होंने अनुसूचित जाति परिवारों में खुद खाना भी खाया ताकि लोग इस कुप्रथा को छोड़ें। इसके अलावा जिस भी सरकारी गैर सरकारी कार्यक्रम में वह जाते थे, वहां नशा निवारण व इसे रोकने और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करते थे। प्रधानमंत्री मोदी के महत्वाकांक्षी स्वच्छता अभियान को उन्होंने कई बार खुद झाड़ू लगाकर आगे बढ़ाया और लोगों को इसके प्रति जागरूक किया।

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ये भी दी सीख 

आचार्य देवव्रत(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में पहाड़ी गाय का होना अनिवार्य है, तभी जाकर प्राकृतिक खेती को किसान आसानी से अपना सकते हैं। 
प्रदेश में अंधाधुंध कीटनाशकों, फफूंदनाशकों और रासायनिक खाद के प्रयोग के भावी खतरों को लेकर चेताते रहे 
शिमला के पीटरहॉफ में प्राकृतिक खेती पर किसानों और बागवानों को जागरूक करने के लिए कार्यशाला की
हिमाचल के आईएएस अफसरों, कृषि अधिकारियों और पत्रकारों को ले जाकर प्राकृतिक खेती के फायदे मौके पर बताए 
प्राकृतिक खेती को लेकर रोहड़ू क्षेत्र के बागवानों के लिए 20 जुलाई को एक कार्यशाला भी आयोजित की जा रही है। इसमें नामी कंपनी के प्रतिनिधियों के अलावा राज्यपाल आचार्य देवव्रत हिस्सा लेंगे

जब राज्यपाल ने प्रशासन और पुलिस को लताड़ा
राज्यपाल आचार्य देवव्रत करीब दो वर्ष पहले जनजातीय क्षेत्र किन्नौर और लाहौल स्पीति के दौरे पर शिमला से हेलीकॉप्टर पर रवाना हुए थे। मौसम खराब होने की सूचना मिलते ही राज्यपाल को रामपुर के शिंगला हेलीपैड में उतरना पड़ा था। राज्यपाल को जब सूचना मिली तो रामपुर के समीप सतलुज के पार कुल्लू जिला के ब्रौ क्षेत्र में अचानक पहुंच गए। क्षेत्र में नशाखोरी और जुआ खेलने की शिकायतों पर गौर करते हुए उन्होंने क्षेत्र का दौरा किया। साथ ही प्रशासन और पुलिस से कहा कि इस क्षेत्र में नशाखोरी और जुआ खेलने पर नकेल कसी जाए।  
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