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मौसम: हिमाचल में भारी बारिश का अलर्ट, कांगड़ा में हाईवे पर भूस्खलन, सुजानपुर में बिजली गिरने से तीन घायल

Thu, 30 Sep 2021 07:17 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला/कुल्लू

सार

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से गुरुवार सुबह जारी बुलेटिन में 30 सितंबर व एक अक्तूबर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। प्रदेश में चार अक्तूबर तक मौसम खराब बना रहने के आसार हैं। नाहन में 57.5, पांवटा साहिब 44.2 और सुजानपुर टिहरा 17 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। 
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कांगड़ा में भारी बारिश से जगह-जगह भूस्खलन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में गुरुवार को भारी बारिश के येलो अलर्ट के बीच भारी नुकसान हुआ है। कुल्लू के रघुपुर में गुरुवार को फिर बादल फटा। इससे दो पुलिया, एक दर्जन पैदल रास्ते बह गए और कई फसलें तबाह हुई हैं। वहीं, कांगड़ा बाईपास पर पहाड़ी गिरने से डेढ़ घंटा मटौर-शिमला नेशनल हाईवे बंद रहा। इस कारण दूध और ब्रेड की सप्लाई प्रभावित रही। दूसरी ओर हमीरपुर के जंदड़ू में बिजली गिरने से सास और बहू घायल हो गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जबकि दो घरों में दरारें आ गईं हैं। उधर, हमीरपुर के उपमंडल सुजानपुर की पंचायत जंदड़ू के गांव ठाणा टिक्कर में सुबह एक मकान पर बिजली गिरने से सरला देवी (60) पत्नी भगवान दास और दूसरे मकान में काम कर रही उनकी बहू कली देवी (35) घायल हो गईं।  दो मकान भी क्षतिग्रस्त हो गए। घर में रखे बिजली के उपकरण भी जल गए।

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शुक्रवार को भी भारी बारिश की चेतावनी
प्रदेश के मैदानी और मध्य पर्वतीय जिलों में शुक्रवार को भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 4 अक्तूबर तक बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है। वीरवार को राजधानी शिमला में हल्की बूंदाबांदी हुई। अन्य क्षेत्रों में मौसम मिलाजुला बना रहा। अक्तूबर के दूसरे सप्ताह में प्रदेश से मानसून विदा होने के आसार हैं।

मानसून सीजन में 10 फीसदी कम बारिश हुई
प्रदेश में 13 जून से 30 सितंबर तक मानसून सीजन के दौरान सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश हुई है। इस अवधि में 686 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि 763 मिलीमीटर बारिश को सामान्य माना गया है। कुल्लू, मंडी, कांगड़ा, शिमला जिला में ही सामान्य से अधिक बारिश हुई। सितंबर में सामान्य से 34 फीसदी और जुलाई में पांच फीसदी अधिक बादल बरसे। जून में 17 फीसदी और अगस्त में 44 फीसदी कम बारिश हुई। 
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रोहडू़ के दलगांव में भारी ओलावृष्टि से सेब की तैयार फसल तबाह 
वहीं, तहसील रोहडू की दलगांव पंचायत में सात से 10 हजार फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई भारी ओलावृष्टि से सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। सेब को मंडियों के लिए भेजने में जुटे बागवानों के सपनों पर चंद मिनटों की ओलावृष्टि ने पानी फेर दिया। अब बागवान तैयार फसल को तबाह होते देख कर भारी निराशा में हैं। ग्रामीणों ने ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से आर्थिक सहायता की मांग उठाई है। जानकारी के अनुसार दलगांव पंचायत के भरडी, सुतली, टांणसा और तमरोण क्षेत्र में मंगलवार सुबह भारी ओलावृष्टि हुई है। ओलावृष्टि इतनी अधिक थी कि सेब की फलों में छेद हो गए है। क्षेत्र के बागवान रोशल लाल बांष्टू, जिया लाल बांष्टू, प्रेम, बलबीर बांष्टू और प्रेम ने बताया कि सेब का तुड़ान अभी शुरू ही हुआ था। बगीचों से अभी हर बागवान ने 100 से 500 पेटियों को ही मंडियों तक पहुंचाया था। अभी बगीचे में हर बागवान की हजारों पेटियां सेब तुड़ान के लिए तैयार था। सेब की पैकिंग का सारा सामान बगीचे में पहुंच चुका था। ओलावृष्टि से उनकी हजारों पेटियां सेब खराब हो गया है। तैयार सेब ओला गिरने के बाद अब पौधों में ही सड़ जाएगा। उन्होंने कहा इस क्षेत्र के बागवानों के पास अब सेब को नालों में फेंकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। 

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मुख्य सचिव ने सभी डीसी से तलब की मानसून से नुकसान की वास्तविक रिपोर्ट

वहीं, मुख्य सचिव रामसुभग सिंह ने हिमाचल प्रदेश के सभी डीसी से मानसून से हुए नुकसान पर रिपोर्ट तलब की है। यह रिपोर्ट नई दिल्ली भेजी जाएगी। इसमें केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश के लिए वित्तीय सहायता मांगी जाएगी। मुख्य सचिव रामसुभग सिंह ने शिमला में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि सभी डीसी से जानकारी प्राप्त होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी।  प्रारंभिक अनुमान के अनुसार हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून में लगभग 1100 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इससे 424 लोगोें की जान जा चुकी है।

इनमें 13 लोग लापता हैं। 700 पशुओं की मौत हो चुकी है। 1000 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। 190 घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। इस प्रारंभिक आकलन के अलावा सरकार चाह रही है कि उपायुक्त एक वास्तविक रिपोर्ट भेजें, जिसे केंद्र सरकार को भेजा जा सके। इसमें वास्तविक मूल्यांकन होगा। इस संबंध में मुख्य सचिव रामसुभग सिंह ने सभी उपायुक्तों को कहा है कि वे वास्तविक आकलन रिपोर्ट जल्दी सरकार को भेजे। सरकार की ओर से भारत सरकार को भी इस संबंध में एक ज्ञापन भेजा जाएगा। वहां से टीम आएगी और वह नुकसान का आकलन करेगी। हर साल एक केंद्रीय टीम हिमाचल प्रदेश आकर नुकसान का आकलन करती है। 
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