उत्तरी ध्रुव और भूमध्य सागरीय क्षेत्र में बना कम दबाव का क्षेत्र
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक सुरेंद्र पॉल ने बताया कि मौसम में बदलाव का बड़ा कारण ग्लोबल वार्मिंग है। इसके अलावा उत्तरी ध्रुव और भूमध्य सागरीय क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने से पश्चिमी विक्षोभ कमजोर हो गया है। सर्दियों में बर्फबारी के लिए अटलांटिक सागर से हवाएं आती हैं। उत्तरी ध्रुव की ओर से ठंडी और भूमध्य सागरीय क्षेत्र की ओर से गर्म हवा आने पर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है। इस बार उत्तरी ध्रुव में हवा कम है और कम दबाव का क्षेत्रफल भी हावी है। कम दबाव के क्षेत्रफल के हावी होने से हवाएं आगे की तरफ नहीं आ रहीं। इससे प्रशांत सागर में भी तापमान सामान्य से ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।
शिमला में लगातार तीसरे साल दिसंबर में नहीं हुई बर्फबारी
राजधानी शिमला में लगातार तीसरे साल दिसंबर 2023 के दौरान बर्फबारी नहीं हुई। शिमला में दिसंबर में साल 2020 में बर्फबारी हुई थी। इससे पहले वर्ष 2018 में बर्फबारी हुई थी। उधर, शिमला में 17 साल बाद सर्दियों में बारिश भी सबसे कम होने की संभावना बन गई है। वर्ष 2007 में जनवरी में सामान्य से 99 फीसदी कम बारिश हुई थी। इस वर्ष 16 जनवरी तक बारिश-बर्फबारी सामान्य से 100 फीसदी कम है। आने वाले दिनों में भी मौसम में बदलाव के आसार कम ही हैं। इस वर्ष बारिश को लेकर प्रदेश में 2017 की जनवरी जैसे हालात बन रहे हैं।
प्रदेश में आठ साल बाद रिकॉर्ड हुई सबसे कम बारिश
प्रदेश में आठ साल बाद दिसंबर 2023 के दौरान सबसे कम बारिश रिकॉर्ड हुई। एक से 31 दिसंबर 2023 तक प्रदेश में सामान्य से 85 फीसदी कम बारिश यानी 5.8 मिलीमीटर बारिश हुई। इस अवधि में 38.1 मिलीमीटर बारिश सामान्य मानी गई है। इससे पहले दिसंबर 2016 में 3 मिलीमीटर ही बादल बरसे थे। वर्ष 2004 से 2023 तक सिर्फ तीन बार 2010, 2017 और 2019 में ही दिसंबर में सामान्य से अधिक बारिश हुई है।