वहीं, सोमवार शाम तक प्रदेश में 315 सड़कें, 72 बिजली ट्रांसफार्मर और 491 पेयजल योजनाएं प्रभावित रहीं। मंगलवार को भी अधिकांश जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी हुई है। 14 अगस्त तक के लिए प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट रहेगा।कुल्लू और मंडी के दो गांव भूस्खलन की जद में आ गए हैं। 21 परिवारों ने घर खाली कर दिए हैं। मंडी के टनिपरी गांव में रविवार रात गांव की पहाड़ी में अचानक बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं, जिससे ग्रामीण दहशत में आ गए। हालात खराब होने के चलते प्रशासन ने नौ परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। कुल्लू के टिचना में पीड़ित 12 परिवारों ने रिश्तेदारों के पास शरण ली है। मवेशियों के लिए टेंट लगाए गए हैं। मणिकर्ण घाटी के बरशैणी पंचायत के शिल्हा गांव के नीचे लगातार भूस्खलन हो रहा है।
उधर, प्रदेश के अधिकांश इलाकों में सोमवार को बारिश हुई। हमीरपुर के गांव डरोगन पट्टी में राजीव कुमार का कच्चा मकान क्षतिग्रस्त हुआ है। कांगड़ा में नौ घर और दो गोशालाएं क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा शिमला और गगल एयरपोर्ट से सोमवार को हवाई उड़ानें नहीं हो सकीं। शिलाई बाजार के पास भी भूस्खलन से करीब एक घंटे वाहनों की आवाजाही ठप रही।
मानसून में अब तक 229 लोगों की गई जान
प्रदेश में इस मानसून सीजन में 20 जून से 11 अगस्त तक 229 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 323 लोग घायल हुए हैं। 36 लोग अभी भी लापता हैं। इस दाैरान 116 लोगों की सड़क हादसों में माैत हुई है। बादल फटने, भूस्खलन, बाढ़ से अब तक 2,388 कच्चे-पक्के घरों, दुकानों को क्षति हुई है। 1,955 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। 1,611 पालतु पशुओं की माैत हुई है। नुकसान का कुल आंकड़ा 2,00,741.57 लाख रुपये पहुंच गया है।
पांवटा-शिलाई-गुम्मा हाईवे पर भूस्खलन, चलती गाड़ियों पर गिरे पत्थर
पांवटा-साहिब-शिलाई-गुम्मा नेशनल हाईवे सुबह करीब 10:00 बजे भूस्खलन के चलते हेवणा के पास बंद हो गया। इस दौरान आयुष विभाग का एक वाहन और टिपर भी इसकी चपेट में आ गया। गनीमत रही कि कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। इस दौरान कई सरकारी और निजी बसें सड़क के दोनों ओर फंसी रहीं। हालांकि सूचना मिलने के बाद कंपनी की मशीनें सड़क बहाली के लिए पहुंचीं।