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घूसखोरी के आरोपी एचएएस अफसर राणा की बढ़ीं मुश्किलें

Mon, 04 Feb 2019 12:32 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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पांवटा में खनन की एक फाइल पर हस्ताक्षर की एवज में एक लाख रुपये की घूस मांगने के आरोप में निलंबित चल रहे एचएएस अधिकारी एचएस राणा की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। घूसखोरी की जांच के बाद अब विजिलेंस ब्यूरो की नजर राणा और उनकी परिवार की संपत्तियों पर है। विजिलेंस सूत्रों का कहना है कि घूसखोरी की जांच के दौरान ही आय से अधिक संपत्ति होने की भी जानकारी हाथ लगी है।

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इसी को देखते हुए ब्यूरो अब राणा के अलावा उनके परिवार के सदस्यों के नाम दर्ज चल अचल संपत्तियों की सूची तैयार करने जा रहा है। साथ ही शासन से भी उनकी घोषित आय व संपत्तियों का ब्यौरा मांगने की तैयारी है। जानकारियां जुटाने के बाद आय से अधिक संपत्ति का मामला बना तो ब्यूरो इसमें भी अभियोग दर्ज करने के लिए सरकार से मंजूरी मांगेगा। फिलहाल राणा के खिलाफ जो घूसखोरी का मामला दर्ज है, उसमें भी उनका बचना असंभव माना जा रहा है।

दरअसल, राणा के खिलाफ ब्यूरो ने मामला दर्ज करने के बाद नजर रखना शुरू कर दिया था। इस दौरान उनकी और पैसा लेने वाले रितेश बंसल, सुलभ अग्रवाल से हुई बातचीत पर भी अपने कान लगा रखे थे। जिसके चलते ब्यूरो ने मुख्यमंत्री को भी राणा के निलंबन को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी थी। इसके बाद ही एचएएस एसोसिएशन की पैरवी व दबाव के बावजूद सरकार ने राणा को निलंबित कर दिया।

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पूर्व एसडीएम के खिलाफ नगर परिषद ने खोला मोर्चा

संजय भारद्वाज, पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा नगर परिषद की बैठक में एक पार्षद ने पूर्व एसडीएम के कार्यकाल के दौरान हुए विकास कार्यों पर सवाल उठाए हैं। शहर में एनएच-07 में बद्रीपुर से वाई प्वाइंट तक बिजली लाइट पोल, यमुना पाथ-वे की पेमेंट तथा 44 विकास कार्यों के लिए हुए टेंडरों की उन्होंने जांच करवाने की बैठक में मांग उठाई है। बैठक में प्रस्ताव पारित कर जिलाधीश सिरमौर से इसकी जांच करवाने की मांग रखी गई है। 

शनिवार को पांवटा नगर परिषद कमेटी की बैठक हुई। इस दौरान पांवटा के पूर्व एसडीएम के खिलाफ एक पार्षद ने मोर्चा खोला गया। जिसमें कहा है कि एचएएस अधिकारी के पास एसडीएम पांवटा रहते हुए नगर परिषद कार्यकारी अधिकारी का करीब डेढ़ वर्ष तक अतिरिक्त प्रभार भी रहा था।

पार्षद का कहना है कि वाई प्वाइंट से बद्रीपुर चौक तक करीब 18 लाख रुपये बजट का बजट हाउस की अनुमति के बिना ही खर्चा गया। न ही एनएच अथॉरिटी से कोई अनुमति ली गई। पांच लाख से अधिक का टेंडर ऑनलाइन करवाने का प्रावधान रहता है। पार्षद ने नप कमेटी के विकास कार्यों के करीब 44 टेंडर (सड़कों पर टाइलें) के बिना जनरल हाउस में पास किए लगवा दिए।

पार्षद ने तीसरे मुद्दे में कहा कि यमुना पाथ-वे के लिए 1 करोड़ रुपये की राशि बिना जनरल हाउस में पास किए तत्कालीन ईओ ने नगर परिषद के खाते से पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर किया। पार्षद ने बैठक में इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाने का प्रस्ताव रखा। उधर, पांवटा नगर परिषद कमेटी के कार्यकारी अधिकारी एसएस नेगी ने कहा कि बैठक में एक पार्षद ने मुद्दा उठाया है। इस विषय पर बैठक में प्रस्ताव लाया गया है। जिसको जिलाधीश सिरमौर के समक्ष रखा जाएगा।
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