मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में 50 साल से पहले सेवारत कर्मचारी के आश्रितों को नौकरी देने के लिए पात्र माना जाता था। इसके अलावा करुणामूलक आधार पर नौकरी देने के मामले वित्त विभाग देखता था। आय सीमा में छूट भी डेढ़ लाख रुपये तक थी, पांच प्रतिशत हर विभाग में नौकरी देने का प्रावधान नहीं था। आवेदन करने के लिए तीन वर्ष की समय छूट थी। नौकरी देने के बाद छह महीने में दो बार परीक्षा देने का प्रावधान भी था।
अब हर विभाग अपने स्तर पर देखेगा मामले
सीएम ने कहा कि करुणामूलक आधार पर नौकरी देने के प्रावधानों में सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब 50 साल की शर्त को पूरी तरह खत्म कर दिया है। वित्त के अलावा अब सभी विभाग अपने-अपने स्तर पर करुणामूलक के मामलों का निपटारा करेंगे। डेट ऑफ डेथ के अनुसार सीनियर पात्र होंगे।
आय में ढाई लाख रुपये तक की छूट, नियमित भर्ती में पांच प्रतिशत नियुक्तियां करुणामूलक आधार पर होंगी। विशेष मामलों का मंत्रिमंडल में तुरंत प्रभाव से निपटारा होगा। आवेदन करने की अवधि मृत्यु के चार साल बाद तक होगी। अगर कोई आश्रित व्यस्क नहीं है, तो व्यस्क होने के बाद चार साल माने जाएंगे।