विभिन्न संगठन अपनी मांगों को लेकर 15 और 16 सितंबर को प्रदेश विधानसभा का घेराव करेंगे। मजदूर संगठन सीटू प्रदेश सरकार की ओर से विस में प्रस्तुत किए गए मजदूर विरोधी पांच अध्यादेशों के खिलाफ हल्ला बोलेगा। सीटू ने सरकार को इन अध्यादेशों को वापस न लेने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने केंद्र और प्रदेश सरकार को चेताया है कि मजदूरी विरोधी कदम से हाथ पीछे नहीं खींचे तो मजदूर आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट काल को भी शासक वर्ग और सरकारें मजदूरों का शोषण करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।
प्रदेश सरकार भी इन्हीं नीतियों का अनुसरण कर रही है। कारखाना अधिनियम 1948 में तबदीली कर प्रदेश में काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 12 किए जा रहे हैं। इससे एक तिहाई मजदूरों की भारी छंटनी होगी। साथ ही मजदूरों का शोषण भी होगा। फैक्टरी की पूरी परिभाषा बदलकर लगभग दो तिहाई मजदूरों को 14 श्रम कानूनों के दायरे से बाहर कर दिया गया है। उद्योगपतियों के कानूनों की अवहेलना करने पर चालान नहीं होगा। उन्हें खुली छूट दी जाएगी। मजदूरों को ओवरटाइम के लिए बाध्य करने से बंधुआ मजदूरी की स्थिति पैदा होगी।
ठेका मजदूर अधिनियम 1970 में बदलाव से हजारों ठेका मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में परिवर्तन से मांगों को लेकर की जाने वाली मजदूरों की हड़ताल पर अंकुश लगेगा। इन बदलावों से प्रदेश के 73 प्रतिशत मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। उधर, दलित शोषण मुक्ति मंच दलितों की मांगों पर 16 सितंबर को विधानसभा के बाहर प्रदर्शन करेगा। मंच के अध्यक्ष जगत राम ने बताया कि सरकार दलितों के संविधानिक अधिकारों को एक एक कर छीन रही है।