विवि से संबद्ध कॉलेजों को लंबित मामले निपटाने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और इससे संबद्ध कॉलेजों में पढ़ने वाले हजारों छात्रों को फीस की वापसी से जुड़े मामलों में अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। विश्वविद्यालय ने यूजीसी की फीस रिफंड नीति 2025-26 को लागू कर दिया है और सभी कॉलेजों तथा संस्थानों को इसे सख्ती से मानने के निर्देश दिए हैं।
यूजीसी की यह नीति साफ तौर पर तय करती है कि छात्र अगर तय समय सीमा के भीतर प्रवेश रद्द करता है या संस्थान बदलता है तो उसकी जमा फीस किस अनुपात में और कितने समय के भीतर लौटाई जाएगी। अलग-अलग चरणों में प्रवेश रद्द होने पर कटौती की सीमा भी तय है ताकि संस्थान मनमर्जी से रकम न काट सकें। नियमों का मकसद छात्रों को आर्थिक नुकसान से बचाना और उन्हें महीनों तक अपने ही पैसे के लिए भटकना न पड़े।
यूजीसी ने गैर अनुपालन को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों को चेतावनी भी दी है। आयोग ने साफ कहा है कि फीस रिफंड से जुड़े सभी लंबित मामलों का फास्ट ट्रैक आधार पर निपटारा किया जाए। साथ ही यह भी कहा है कि अगर किसी संस्थान ने नियमों की अनदेखी की तो यूजीसी क्लॉज 5 के तहत दंडात्मक कार्रवाई हो सकती है जिसमें मान्यता से जुड़े कदम तक शामिल हैं। विश्वविद्यालय के स्तर पर लिए गए इस फैसले के बाद अब दबाव सीधे तौर पर कॉलेजों और संस्थानों पर बढ़ गया है। कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी ने निर्देश आदेश के मुताबिक यह नीति विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले हर कॉलेज और संस्थान में लागू होगी। प्रशासन का कहना है कि सभी संस्थान अपनी आंतरिक प्रक्रिया तुरंत दुरुस्त करें और छात्रों की फीस वापसी से जुड़े मामलों का निपटारा तय समय सीमा में करें।