हिमाचल प्रदेश की युवा पीढ़ी को सिंथेटिक ड्रग के नशे से बचाने के लिए पुलिस पीआईटी एनडीपीएस अधिनियम में कड़ी कार्रवाई कर रही है। इसके तहत आदतन नशा तस्करों की पहचान करके उन्हें तीन महीने के लिए जेल भेजा जा रहा है। जिला शिमला ने सबसे अधिक आदतन नशा तस्करों पर कार्रवाई है। इस साल 176 आदतन नशा तस्करों पर पुलिस ने कार्रवाई की है। शिमला पुलिस ने पांच महीनों में 40 आदतन नशा तस्करों को जेल भेजा है।
बीबीएन में पुलिस ने 24 आदतन नशा तस्करों पर प्रिवेंटिव डिटेंशन के तहत कार्रवाई की है। नूरपुर में 18 नशा तस्करों को चिह्नित करके जेल भेजा गया है। इसके अलावा सिरमौर और कांगड़ा में 16, सोलन में 15, कुल्लू में 13, देहरा में 9, मंडी में 8, बिलासपुर में 7, किन्नौर और ऊना में 3, चंबा और हमीरपुर में दो-दो आदतन नशा तस्करों को इस अधिनियम के तहत तीन महीने के लिए जेल भेजा गया है। कई आरोपियों की डिटेंशन अवधि को छह महीने तक भी बढ़ाया गया है। लाहौल-स्पीति में इस अधिनियम के तहत कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।
पीआईटी एनडीपीएस एक्ट में सख्त कार्रवाई का है प्रावधान
पीआईटी एनडीपीएस अधिनियम 1988 मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य आदतन ड्रग माफियाओं और तस्करों के खिलाफ निवारक निरोध की सख्त कार्रवाई करना है।