हिमाचल के स्कूली खिलाड़ी अब जोन स्तर पर अंडर-19 खेलकूद में कुराश खेल में अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। इस बारे में प्रदेश स्कूली क्रीड़ा संघ ने निर्णय लिया है। प्रदेश में पहली बार ट्रायल बेस पर जोन स्तर पर कुराश को लागू किया जाएगा। पहले यह खेल ट्रायल बेस पर शुरू किया जाएगा। ट्रायल सफल रहता है, तो इसे खेलों में हर साल शामिल किया जाएगा।
कुराश उज्बेकिस्तान की पारंपरिक मार्शल आर्ट की शैली
कुराश कुछ हद तक पहलवानी की तरह ही है। बस दोनों खेलों में नियम थोड़े अलग हैं। हालांकि, यह खेल कुश्ती जैसा ही लगता है। कुराश रेसलिंग के लिए उपयोग होने वाली तुर्की टर्म है। कुराश उज्बेकिस्तान की पारंपरिक मार्शल आर्ट की शैली है। कुराश को आसान शब्दों में समझे तो यह कुश्ती का वह रूप है, जिसमें शरीर के निचले भाग का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
ये हैं खेल के नियम
इस खेल में कमर के नीचे के हिस्से को न तो पकड़ा जाता है और न ही हिट या उस पर किक मारी जा सकती है। इस खेल में न तो आर्म वॉक्स किया जाता है और न ही चोकिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस खेल के नियम की बात करें, तो इसमें खिलाड़ी को अपने विरोधी को ग्राउंड पर गिराना होता है। खिलाड़ी अपने विरोधी को मजबूत तरीके से थ्रो करता है, तो उसे खलोल कहा जाता है और वह उस बाउट का विजेता बन जाता है। गौरतलब है कि स्कूल स्तर में खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश स्कूल क्रीड़ा संघ द्वारा नई नई खेलें शामिल की जा रही है। इसमें अब कुराश भी शामिल हो रहा है।
इस बार कुराश खेल को शामिल किया जा रहा है। पहले ट्रायल बेस पर शुरू किया जाएगा। ट्रायल सफल रहता है, तो हर साल इसे आयोजित किया जाएगा-
तिलक बिजलवान, उपनिदेशक, उच्च शारीरिक शिक्षा शिमला।