जीडीपी में तीन फीसदी से ज्यादा की गिरावट के बाद हिमाचल के उद्योग भी मंदी के भंवर में फंस गए हैं। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) के उद्योगों में 20, पांवटा साहिब में 15 और ऊना के उद्योगों में 50 फीसदी तक उत्पादन कम हो गया है। बीबीएन का फार्मा उद्योग भी इससे अछूता नहीं है। एशिया की 40 फीसदी दवा निर्माण करने का तमगा अकेले बीबीएन के पास है। कई उद्योग कामगारों की छंटनी कर रहे हैं।
प्रदेश में फार्मा उद्योगों सहित छोटी-बड़ी करीब 3200 औद्योगिक इकाइयां हैं। केंद्र के जीडीपी की दर में 3 फीसदी गिरावट आने की बात कहने से उद्योगों में मंदी की मार साफ झलक रही है। उद्योगों के पास उत्पादों की मांग नहीं आ रही है। उद्योगों को बैंक लोन तक नहीं दे रहे हैं। प्रदेश को सर्वाधिक 63 फीसदी राजस्व उद्योगों से आता है।
ऊना इंडस्ट्री एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष प्रो. बीएन कश्यप के अनुसार जिले में करीब 60 फीसदी तक मंदी की मार पड़ चुकी है। मैहतपुर उद्योग संघ के पूर्व प्रधान बीएस चंदेल ने कहा कि मंदी का असर तो है। हिमाचल प्रदेश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज पांवटा इकाई के प्रधान सतीश गोयल, उद्यमियों बीडी त्यागी, अरुण अग्रवाल व नवीन अग्रवाल का कहना है कि आर्थिक मंदी का असर अब औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ने लगा है।