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Himachal News: नियम और सख्त... फार्मा उद्योगों को देनी होगी सुरक्षा रिपोर्ट, नई व्यवस्था लागू

Tue, 19 May 2026 12:17 PM IST
Krishan Singh रविंद्र शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना।

सार

 केंद्र सरकार ने दवाओं के दुष्प्रभाव और मरीजों पर उनके असर को लेकर नई व्यवस्था लागू की है।
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फार्मा सेक्टर(सांकेतिक)। - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
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देशभर में बाजार में उतरने वाली नई दवाओं की निगरानी अब और सख्त होगी। केंद्र सरकार ने दवाओं के दुष्प्रभाव और मरीजों पर उनके असर को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के संयुक्त दवा नियंत्रक (भारत) डाॅ. आर चंद्रशेखर ने इस संबंध में एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि नई दवाओं की पीरियोडिक सेफ्टी अपडेट रिपोर्ट (पीएसयूआर) अब केवल मंजूरी मिलने की तारीख से नहीं, बल्कि बाजार में दवा की वास्तविक बिक्री शुरू होने की तिथि से मानी जाएगी। ऐसे में फार्मा कंपनियों को दवा बाजार में उतारने के बाद से मरीजों पर पड़ने वाले प्रभाव, साइड इफेक्ट और सुरक्षा संबंधी जानकारियों की नियमित रिपोर्ट देनी होगी।

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नई व्यवस्था के तहत कंपनियों को दवा के अलग-अलग डोज, फॉर्मूलेशन और उपयोग से जुड़े सभी आंकड़े एक ही रिपोर्ट में बताने होंगे। इससे दवा की प्रभावशीलता और संभावित जोखिमों की एक साथ समीक्षा संभव हो सकेगी। इस एडवाइजरी के बाद प्रदेश के फार्मा उद्योगों के लिए यह नियम चुनौती के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ाएगा। हिमाचल देश का बड़ा फार्मा हब बन चुका है और यहां निर्मित दवाएं देश-विदेश तक पहुंचती हैं। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत होना जरूरी है। नई व्यवस्था लागू होने से बाजार में आने वाली दवाओं की लगातार मॉनीटरिंग होगी और किसी भी दवा के दुष्प्रभाव सामने आने पर समय रहते कार्रवाई संभव हो पाएगी। इससे मरीजों की सुरक्षा के साथ-साथ फार्मा कंपनियों की जवाबदेही भी तय होगी। हिमाचल में जिला ऊना सहित सोलन के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़, कालाअंब सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में सैकड़ों दवा निर्माण इकाइयां संचालित हैं। 
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कई बार हो चुके हैं दवाओं के सैंपल फेल

प्रदेश में जिला सोलन को फार्मा का हब माना जाता है। प्रदेश में करीब 600 फार्मा उद्योग प्रदेश स्थापित हैं। सीडीएससीओ समय-समय पर बाजार में मौजूद दवाइयों के सैंपल लेकर उन्हें लैब में जांच के लिए भेजता है। ऐसे में प्रदेश में निर्मित कई दवाइयों के सैंपल सीडीएससीओ के तय मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं। मार्च में भी 47 सैंपल फेल हुए।
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