नई नीति के तहत मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट की व्यवस्था भी होगी। यदि छात्र किसी कारणवश बीच में पढ़ाई छोड़ता है, तो उसके अर्जित क्रेडिट सुरक्षित रहेंगे। बाद में वह उसी या किसी अन्य संस्थान में प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई जारी रख सकेगा। निर्धारित अवधि के भीतर छात्र दोबारा प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई वहीं से शुरू कर सकेगा।
नई व्यवस्था में एक वर्ष के बाद प्रमाणपत्र, दो वर्ष बाद डिप्लोमा और निर्धारित क्रेडिट पूरे करने पर डिग्री देने का प्रावधान भी शामिल है। छात्र पढ़ाई के दौरान दूसरे संस्थानों से ऑनलाइन या ऑफलाइन कोर्स लेकर भी क्रेडिट अर्जित कर सकेंगे। इन क्रेडिट को एबीसी सिस्टम से छात्र के मुख्य अकादमिक रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा। यदि कोई छात्र किसी कारणवश कोर्स बीच में छोड़ता है, तो उसकी पढ़ाई पूरी तरह समाप्त नहीं मानी जाएगी।
अभी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बीच सत्र माइग्रेशन की व्यवस्था सीमित है। कई मामलों में विद्यार्थियों को दोबारा प्रवेश प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है या विषय और परीक्षा संरचना अलग होने के कारण सेमेस्टर दोहराना पड़ता है। नई प्रणाली में क्रेडिट आधारित ढांचा लागू होने के बाद यह प्रक्रिया डिजिटल रूप से संचालित होगी।
एनईपी लागू होने के बाद छात्र दूसरे राज्यों की यूनिवर्सिटी में भी माइग्रेशन कर पाएंगे। माइग्रेशन के बाद जिस विश्वविद्यालय से छात्र अधिकतम क्रेडिट अर्जित करेंगे, उसी विश्वविद्यालय की डिग्री उन्हें दी जाएगी।-बीके शिवराम, डीन ऑफ स्टडीस, एचपीयू