खतरे को भांपते ही गाड़ी से उतर गए थे विक्र सिंह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बिकर सिंह को रास्ते में पहाड़ी से लगातार छोटे-छोटे पत्थर गिरते दिखाई दिए। खतरे को भांपते हुए उन्होंने चालक से वाहन रोकने का आग्रह किया और खुद पैदल चलने लगे। गाड़ी ने जैसे ही उनसे कुछ दूरी तय की तो अचानक पहाड़ी से भारी चट्टानें सूमो पर आ गिरीं। देखते ही देखते वाहन मलबे और चट्टानों के नीचे दब गया। यह भयावह मंजर बिकर सिंह की आंखों के सामने हुआ, जिसमें 13 लोगों की जान चली गई।
दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए
यदि बिकर सिंह भी वाहन में बैठे रहते तो शायद वह भी इस हादसे का शिकार हो जाते। उनके समय रहते वाहन से उतरने के फैसले ने उन्हें नई जिंदगी दे दी। इस दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों के चिराग बुझा दिए हैं। बिकर सिंह के लिए यह घटना किसी दूसरे जन्म से कम नहीं है और उन्हें ताउम्र याद रहेगा। हादसे से बचने के बाद बिकर सिंह सीधे अपने गांव पहुंचे और सबसे पहले कुलदेवी के मंदिर में माथा टेककर देवी का आभार व्यक्त किया। उन्हें ताउम्र याद रहेगा।
लाहौल होते हुए पांगी जा रहे थे सभी लोग
बता दें, जिला लाहौल-स्पीति के संसारी-किलाड़-तिंदी-थिरोट सड़क पर शुक्रवार दोपहर एक टाटा सूमो टैक्सी पर पहाड़ी से भारी चट्टान गिर गई। इसमें सवार सभी 13 लोगों की गाड़ी में ही दबकर मौत हो गई। कडूनाला और श्योर के बीच गोरना के पास शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे के आसपास यह हादसा हुआ। टैक्सी नंबर टाटा सूमो सभी लोग कुल्लू से लाहौल होते हुए चंबा के पांगी जा रहे थे। रास्ता बंद होने के कारण गुरुवार को तिंदी में रुके थे। शुक्रवार जब रास्ता बहाल हुआ तो वाहन पांगी की ओर बढ़ा लेकिन रास्ते में हादसा हो गया।
हादसे में मां-बेटी, बाप-बेटे और पति-पत्नी की भी हुई मौत
इस हादसे ने पूरे पांगी और उदयपुर घाटी को गहरे सदमे में डाल दिया है। कई परिवारों के चिराग बुझ गए। किसी घर का इकलौता बेटा चला गया तो मां-बेटे की जिंदगी एक साथ खत्म हो गई। छह महीने का मासूम भी इस हादसे का शिकार बन गया। हादसे की खबर जैसे ही पांगी और लाहौल घाटी के लोगों तक पहुंची तो मातम छा गया। बताया जा रहा है कि अधिकांश लोग कुल्लू से अपने घर पांगी लौट रहे थे। कोई अपना इलाज करवाकर जा रहा था तो कोई जरूरी काम निपटाकर घर लौट रहा था। किसी के घर में बुजुर्ग बेटे का इंतजार कर रहे थे तो कहीं बच्चों की निगाहें अपने माता-पिता की राह देख रही थीं। शाम तक घर लौटने की उम्मीद एक दर्दनाक खबर में बदल गई।