विशेष रूप से गत्ता फैक्ट्री, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप और अन्य उद्योग, जहां पहले कम कर्मचारियों के कारण ईएसआई लागू नहीं हो पाया था, वहां अब इसका व्यावहारिक लाभ देखने को मिल सकता है। ईएसआई योजना में आने वाले कर्मचारियों को चिकित्सा उपचार, अस्पताल सुविधा, दवाइयां और बीमारी के दौरान आर्थिक सहायता उपलब्ध होती है। कार्यस्थल पर दुर्घटना होने की स्थिति में कर्मचारियों को अपंगता हित लाभ और आश्रितों को आश्रित जनहित लाभ भी दिया जाता है।
उधर, कर्मचारी बीमा निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक कर्नल मनजीत कटोच ने कहा कि ईएसआईसी से उद्योगों को सीधा आर्थिक लाभ भले न मिले, लेकिन इससे कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ेगी, इलाज का आर्थिक बोझ कम होगा। प्रदेश चैंबर आफ काॅमर्स के अध्यक्ष सतीश गोयल और कानूनी सलाहकार देवव्रत यादव ने कहा कि जोखिम भरे उद्योग, जिनमें एक कर्मचारी होने पर भी निगम में पंजीकरण अनिवार्य है। लोहा और इस्पात उत्पादन उद्योग, कास्टिंग और फोर्जिंग फाउंड्री, रसायन, नारकोटिक, पेपर पल्प उत्पादन, फास्फेटिक और सिंथेटिक रबर निर्माण आदि उद्योगों में बढ़ते सुरक्षा मानकों को देखते हुए भविष्य में जोखिम भरे उद्योगों के लिए ईएसआई कवरेज को और व्यापक बनाया गया है।