हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिली है। बुधवार को लोक भवन शिमला में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल ने नाबार्ड समर्थित तीन पारंपरिक हिमाचली उत्पादों के प्रतिनिधियों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किए। इस दौरान कारीगर समुदायों के योगदान को भी सम्मानित किया गया। जीआई प्रमाणपत्र पाने वाले उत्पादों में हिमाचल रणसिंघा (वाद्य यंत्र), हिमाचल हस्तनिर्मित गलीचा (कालीन) और हिमाचल काष्ठ नक्काशी शिल्प शामिल हैं। नाबार्ड के हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय ने इन उत्पादों के जीआई पंजीकरण को सुगम बनाने में सहयोग किया है। जीआई पंजीकरण से इन पारंपरिक उत्पादों की विशिष्ट पहचान और प्रामाणिकता को मजबूती मिलेगी। साथ ही, इनके बाजार विस्तार, ब्रांडिंग और व्यावसायिक संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे इन शिल्पों से जुड़े कारीगरों के लिए आजीविका के नए अवसर भी सृजित हो सकेंगे।