उन्होंने प्रस्तावित ऑनलाइन लॉटरी व्यवस्था को लेकर विशेष चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसमें रोजाना 12 ड्रॉ और साल में तीन बंपर ड्रॉ का प्रावधान है। इससे जुए की पहुंच सीधे लोगों के मोबाइल फोन और घरों तक हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में कई परिवारों की आय, बचत और पेंशन का पैसा लॉटरी में चला गया, जिससे वे आर्थिक संकट में फंसे। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 38 और 47 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य का दायित्व जनकल्याण और हानिकारक गतिविधियों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2026 में हिमाचल प्रदेश का कर्ज करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और कर्ज-जीडीपी अनुपात 42 फीसदी से अधिक है। ऐसे में लॉटरी से प्रस्तावित करीब 100 करोड़ रुपये की सालाना आय वित्तीय संकट का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने जीएसटी अनुपालन मजबूत करने और डिजिटल एकीकरण पर जोर देते हुए दावा किया कि इससे सालाना 250 से 350 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सकता है। ठाकुर ने मुख्यमंत्री से लॉटरी टेंडर रद्द कर प्रदेश में लंबे समय से चली आ रही लॉटरी विरोधी नीति को कायम रखने की मांग की।