फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिमला: अनुराग ठाकुर बोले- लॉटरी हिमाचल के वित्तीय संकट का समाधान नहीं, तत्काल रद्द किया जाए टेंडर

Wed, 26 Aug 2026 07:36 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर वित्त विभाग की ओर से जारी लॉटरी टेंडर को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में दो दशक से लॉटरी पर चली आ रही राजनीतिक सहमति को बनाए रखा जाना चाहिए।
विज्ञापन
सांसद अनुराग ठाकुर। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश में राज्य संचालित लॉटरी दोबारा शुरू करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर वित्त विभाग की ओर से जारी लॉटरी टेंडर को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में दो दशक से लॉटरी पर चली आ रही राजनीतिक सहमति को बनाए रखा जाना चाहिए। अनुराग ठाकुर ने कहा कि ऑनलाइन और ऑफलाइन लॉटरी व्यवस्था के लिए एकल बिक्री एजेंट नियुक्त करने का प्रस्ताव राज्य के हित में वापस लिया जाना चाहिए। हिमाचल में लॉटरी पर प्रतिबंध लगाने की शुरुआत 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की सरकार ने की थी। इसके बाद 2007 में लॉटरी दोबारा शुरू होने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की सरकार ने भी इस पर रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा कि इसके बाद विभिन्न सरकारों ने वित्तीय दबाव के बावजूद प्रतिबंध को जारी रखा।

विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने प्रस्तावित ऑनलाइन लॉटरी व्यवस्था को लेकर विशेष चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इसमें रोजाना 12 ड्रॉ और साल में तीन बंपर ड्रॉ का प्रावधान है। इससे जुए की पहुंच सीधे लोगों के मोबाइल फोन और घरों तक हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में कई परिवारों की आय, बचत और पेंशन का पैसा लॉटरी में चला गया, जिससे वे आर्थिक संकट में फंसे। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 38 और 47 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य का दायित्व जनकल्याण और हानिकारक गतिविधियों से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अनुराग ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2026 में हिमाचल प्रदेश का कर्ज करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और कर्ज-जीडीपी अनुपात 42 फीसदी से अधिक है। ऐसे में लॉटरी से प्रस्तावित करीब 100 करोड़ रुपये की सालाना आय वित्तीय संकट का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने जीएसटी अनुपालन मजबूत करने और डिजिटल एकीकरण पर जोर देते हुए दावा किया कि इससे सालाना 250 से 350 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व जुटाया जा सकता है। ठाकुर ने मुख्यमंत्री से लॉटरी टेंडर रद्द कर प्रदेश में लंबे समय से चली आ रही लॉटरी विरोधी नीति को कायम रखने की मांग की।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें