जांच एजेंसियां सीडीआर भी खंगालेंगी
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि जांच एजेंसियां पुलिस कर्मियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी खंगालेंगी। इससे यह पता लगाया जाएगा कि वे किन-किन लोगों के लगातार संपर्क में थे और नशा तस्करी के नेटवर्क में उनकी भूमिका कितनी गहरी थी। जांच का दायरा केवल पुलिस कर्मियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके संपर्कों और संभावित सहयोगियों तक भी बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि चिट्टा तस्करी का यह अवैध धंधा किसके संरक्षण में चल रहा था। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि यदि किसी भी स्तर पर वरिष्ठ अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा है कि नशे के खिलाफ सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है। पुलिस विभाग की साख को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार का उद्देश्य केवल दोषियों को सजा दिलाना ही नहीं, बल्कि नशा तस्करी के पूरे नेटवर्क को तोड़ना है, ताकि प्रदेश को नशामुक्त बनाया जा सके।
पुलिस अधीक्षकों ने ढिलाई बरती तो पीएचक्यू करेगा कड़ी कार्रवाई
मुख्यमंत्री द्वारा चिट्टा तस्करी में संलिप्त 11 पुलिस कर्मियों की एक साथ बर्खास्तगी के बाद डीजीपी अशोक तिवारी ने दूसरे ही दिन पुलिस अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है। डीजीपी ने कहा है कि विभाग के कर्मियों की चिट्टा तस्करी में संलिप्तता बर्दाश्त नहीं होगी। ऐसे में मामलों में पीएचक्यू सीधी कार्रवाई करेगा। कार्रवाई न केवल संलिप्त कर्मियों पर, बल्कि ऐसे अपराधियों के प्रति नरमी बरतने, संरक्षण देने या लापरवाही दिखाने वाले अधिकारियों पर भी होगी। तिवारी ने चेताया है कि यदि थाने का एसएचओ अपने स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता तो एसपी कार्रवाई करेंगे, एसपी की विफलता पर रेंज और पीएचक्यू कड़ी कार्रवाई करेगा।