सोलन जिले में टमाटर का सीजन समाप्त हो गया है, जबकि सिरमौर के कुछ क्षेत्रों से टमाटर की खेप सब्जी मंडी पहुंच रही है। जिसके किसानों को उचित दाम मिल रहे हैं। हालांकि इस बार पिछले वर्ष से दो गुणा कम कारोबार हुआ है। पिछले वर्ष सब्जी मंडी सोलन में साढ़े सात लाख टमाटर क्रेट से तीन अरब 75 करोड़ का कारोबार हुआ था, जबकि इस बार साढ़े छह लाख क्रेट से एक अरब 95 करोड़ का ही कारोबार हो सका है। यानी, इस बार पिछले वर्ष की तुलना में कारोबार पौने दो अरब रुपये कम हुआ है।
इसका मुख्य कारण कोविड के बीच भी इस वर्ष किसानों को टमाटर के अच्छे दाम नहीं मिल पाए हैं। वहीं बाहरी राज्यों में टमाटर की अधिक पैदावार भी इसका कारण रहा। टमाटर का सीजन जुलाई से नवंबर तक चलता है। इस बार जुलाई में जब सीजन शुरू हुआ तो 50 से 300 रुपये प्रति क्रेट के हिसाब से किसानों को दाम मिले। जिस कारण अधिकतर किसान इस बार टमाटर की लागत भी पूरी नहीं कर पाए।
इसका प्रभाव इस बार सब्जी मंडी के कारोबार पर भी पड़ा है। उधर, एपीएमसी के सचिव डॉ. रविंद्र शर्मा ने बताया कि बाहरी राज्यों में टमाटर की अधिक पैदावार सहित प्रदेश में इस बार निम्न स्तर का टमाटर होने से किसानों को कम दाम मिले। इस कारण कारोबार भी दो गुणा कम हुआ है। हालांकि पिछले वर्ष कोविड काल में लॉकडाउन के बीच भी किसानों को टमाटर के अच्छे दाम मिले हैं। अब सिरमौर जिले के कुछ क्षेत्रों से टमाटर मंडी पहुंच रहा है, जिसके किसानों को उचित दाम मिल रहे हैं।
खराब बीज भी रहा कारोबार कम होने का कारण
अप्रैल, मई में ओलावृष्टि और अधिक बारिश से टमाटर की फसलें नष्ट हुई थीं, जिसके बाद कई क्षेत्रों में किसानों ने दोबारा टमाटर और शिमला मिर्च की रोपाई भी की। वहीं जब टमाटर की फसल तैयार होने लगी तो सैकड़ों किसानों की ओर से लगाया टमाटर का बीज ही खराब निकला।
बीज खराब होने के कारण टमाटर का सही आकार नहीं बन पाया। इस टमाटर की डिमांड बहुत कम रही। इस बार हिम सोना टमाटर भी हल्के स्तर का रहा। एक सप्ताह तक टिकने वाला टमाटर दो से तीन दिन में ही खराब हो रहा था। इस कारण खरीदार भी कम मिले।