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आपातकाल में किसी अन्य अपराध में जेल गए होंगे तो रद्द होगी सम्मान राशि, विधेयक पेश

Thu, 18 Mar 2021 09:14 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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हिमाचल विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश लोकतंत्र प्रहरी सम्मान विधेयक 2021 गुरुवार को सदन के पटल पर रखा गया। इसे आगामी दिनों में पारित किया जाएगा। इस विधेयक के अनुसार देश में आपातकाल यानी 25 जून 1975 से लेकर 21 मार्च 1977 तक बहुत से लोगों ने लोकतंत्र के अस्तित्व को बचाने और जनता के मौलिक अधिकारों के लिए संरक्षण के लिए संघर्ष किया। राजनीतिक और सामाजिक कारणों से जो आंतरिक सुरक्षा अधिनियम 1971 या भारत रक्षा नियम 1971 या दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के उपबंधों के अंतर्गत जेलों में बंद रहे हैं, उन्हें सम्मान राशि देने का निर्णय लिया गया है। इस प्रयोजन के तहत आवेदकों के दावों पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया जाना भी प्रस्तावित है। समिति कई आधारों झूठे दस्तावेज पेश करने और किसी अपराध में दंडित किए जाने पर सम्मान राशि के आदेशों को रद्द करने के लिए सशक्त होगी।

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अगर तीनों कृषि कानून काले तो सफेद कौन सा : कंवर
कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने विपक्ष के नेताओं द्वारा लाए गए कटौती प्रस्ताव की चर्चा के जवाब में जमकर पलटवार किया। विपक्ष के विधायकों द्वारा केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि सुधार कानूनों को गलत ठहराने पर मंत्री ने सवाल किया कि अगर ये तीनों कृषि कानून काले हैं तो सफेद कौन सा है। कंवर ने कहा कि कृषि कानूनों ने किसानों को अपने उत्पाद बेचने की स्वतंत्रता दी है। दावा किया कि पड़ोसी राज्य पंजाब ने नए कृषि कानूनों को मंजूर कर लिया है और पंजाब में कांट्रेक्ट फार्मिंग पहले से ही चल रही है।

उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन वास्तव में किसानों के लिए नहीं बल्कि वोटों के लिए है। इसका उदाहरण हरा पटका पहने हुए कुछ लोग पश्चिम बंगाल तक पहुंच गए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि हिमाचल के किसान नए कृषि कानूनों के पक्ष में हैं। मंत्री के बयान के बाद विपक्ष द्वारा इन कटौती प्रस्तावों को वापस न लेने पर सदन ने इन्हें ध्वनिमत से नामंजूर कर दिया। चर्चा का जवाब देते हुए कंवर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने मंडियों व किसानों को और मजबूत किया है। राज्य में जहां 10 मंडी समितियां गठित हैं, वहीं 63 मंडियों का निर्माण भी हुआ है।
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कुछ समय पहले प्रदेश में किसानों के केवल 10 फीसदी उत्पाद ही मंडियों में बिक्री के लिए पहुंचते थे जबकि अब 40 फीसदी से अधिक उत्पाद मंडियों में बिक रहे हैं। परंपरागत बीजों को संरक्षित करने के लिए सरकार ने स्वर्ण जयंती पारंपरिक बीज संरक्षण योजना आरंभ की है और परंपरागत फसलों और प्राकृतिक कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए मार्केटिंग की व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्य में कोल्ड चेन विकसित करने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट केंद्र को मंजूरी के लिए भेजा है। इसके अलावा परंपरागत दालों के बीज सुधार का एक प्रोजेक्ट भी केंद्र को भेजा है।

इससे पूर्व कटौती प्रस्तावों पर हुई चर्चा में हिस्सा लेते हुए जगत सिंह नेगी ने प्रदेश सरकार से एमएसपी के लिए कानून लाने की मांग की। विधायक हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि नए कृषि कानूनों से खाद्यान्नों की कालाबाजारी बढ़ेगी। नंद लाल ने प्रदेश सरकार से कृषि उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। राकेश सिंघा ने सरकार की नीतियों को किसानों और बागवानों का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। उन्होंने किसानों और बागवानों के हितों के लिए गठित एसआईटी को जारी रखने की मांग भी की। लखविंद्र राणा ने अपने चुनाव क्षेत्र में कूहलों की खस्ता हालत का मामला उठाया और किसानों के ऋण माफ  करने की मांग की।

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