शहर की सड़कों पर बिना परमिट के वाहन चलाने संबंधी जनहित याचिका की सुनवाई 17 दिसंबर तक टल गई है। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को आदेश दिए कि वे अगली सुनवाई तक अपने- अपने शपथ पत्र दायर करें। अपने पिछले आदेशों के तहत हाईकोर्ट ने प्रदेश विधानसभा के सचिव को अतिरिक्त प्रतिवादी बनाते हुए आदेश दिए थे कि उन सभी लोगों की जानकारी अदालत के समक्ष रखें जिन्हें विधानसभा द्वारा 318 परमिट जारी किए हैं।
अदालत को बताया गया कि विधानसभा द्वारा प्रतिबंधित-वर्जित सड़कों पर वाहन चलाने संबंधी 318 परमिट जारी किए हैं। यह 21 अगस्त 2014 तक वैध हैं। मुख्य सचिव ने अदालत को शपथपत्र के माध्यम से बताया कि वर्ष 2008 से 2014 तक 3023 परमिट जारी किए हैं। इनमें से 2538 परमिट रिन्यू किए थे।
अदालत ने सरकार को आदेश दिए थे कि उन सभी लोगों की जानकारी अदालत को दें जिन्हें प्रतिबंधित-वर्जित सड़कों पर वाहन चलाने संबंधी परमिट जारी किए हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि प्रतिबंधित -वर्जित सड़कों पर बिना परमिट के वाहन चलाने बारे निगरानी करने के लिए शिली चौक और सीटीओ के पास सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं।
एसपी शिमला ने शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को बताया कि प्रतिबंधित - वर्जित सड़कों पर एचआरटीसी टैक्सी तेज गति से चलाई जा रही है जोकि ट्रैफिक व्यवस्था को भंग कर रही है। मुख्य सचिव प्रधान सचिव परिवहन डीसी शिमला और एसपी शिमला को आदेश दिए है कि वह एचआरटीसी टैक्सी की आवाजाही 14 -10- 2011 के आदेशों के अनुसार सुनिश्चित करें।
अदालत ने प्रधान सचिव परिवहन और एसपी शिमला को आदेश दिए हैं कि वे शपथ पत्र के माध्यम से अदालत को बताएं कि एचआरटीसी टैक्सी चलाने के लिए कितने रूट जारी किए हैं। अदालत ने सभी प्रतिवादियों को आदेश दिए कि वे उन सभी लोगों के बारे में स्टेटस रिपोर्ट दायर करें जो प्रतिबंधित-वर्जित सड़कों के आसपास रहते हैं और उन्हें परमिट जारी किया है।