विभागीय जांच की एवज में पदोन्नति से दरकिनार करने वाले सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) को प्रदेश उच्च न्यायालय ने पिछली तारीख से सब इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत करने के आदेश जारी किए हैं। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर ने हरि सिंह की दायर याचिका का निपटारा करते हुए अपने आदेशों में यह स्पष्ट किया कि प्रार्थी को सजा के लिए जारी किया गया कारण बताओ नोटिस और उसके सेवा के रिकॉड में की गई प्रतिकूल टिप्पणी कानून सम्मत नहीं है।
न्यायालय ने पाया कि पुलिस विभाग ने प्रार्थी को पदोन्नत करने से यूं ही वंचित कर दिया। याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार 21 मार्च 2017 को एसपी मंडी ने प्रार्थी को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह पूछा था कि क्यों न उसके खिलाफ सेवा में लापरवाही बरतने के लिए सेनशियोर की सजा दी जाए। इसके अलावा उसके सेवा से संबंधित रिकॉर्ड में भी एक अप्रैल 2016 से 30 मार्च 2017 तक आपराधिक मामले में जांच को ठीक ढंग से न किए जाने के आरोप के लिए प्रतिकूल टिप्पणी की गई थी।
प्रार्थी का यह आरोप था कि इस कारण गलत तरीके से अपर स्कूल कोर्स को उत्तीर्ण करने के बावजूद भी उसे सब इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत नहीं किया गया। प्रार्थी ने उसके खिलाफ जारी किए गए कारण बताओ नोटिस व उसकी प्रतिकूल टिप्पणी के खिलाफ दायर प्रतिवेदन और अपील में पारित किए गए आदेशों को रद्द करने की गुहार लगाई गई थी। न्यायालय ने पाया कि एक ही कारण के लिए सजा के लिए कारण बताओ नोटिस और सेवा रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणी करना कानूनी तौर पर गलत है।