हिमाचल में लॉकडाउन और कर्फ्यू से प्रदेश के किसानों की सब्जियां मंडियों तक पहुंचाने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से कृषकों के लिए संकट खड़ा हो गया है। किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि तैयार फसलों को देश की बड़ी मंडियों तक कैसे पहुंचाएं। शिमला की ढली मंडी में किसानों की ज्यादा फसलों को नहीं बेचा जा सकता और न फसलों के अच्छे दाम मिल सकते हैं।
बड़ी समस्या यही है कि फसलों को मंडियों तक पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो पाई है। किसानों का कहना है कि खेतों में पिछले कई दिन से फसलें तैयार हैं, लेकिन लॉकडाउन के कारण फसलों का तुड़ान तक नहीं कर पा रहे। स्थानीय ढली मंडी में सब्जियों की खपत कम है। किसानों की फसलें बेचने के लिए निकटतम सब्जी मंडी ढली ही है, लेकिन यहां ज्यादा फसलें नहीं बेची जा सकतीं।
पिछले कई सालों से किसान अपनी फसल चंडीगढ़ या दिल्ली में बेचते रहे हैं। इस बार लॉकडाउन ने दिक्कतें बढ़ा दी हैं। किसान सरकार से आस लगाए बैठे हैं कि उनकी फसलें मंडियों तक पहुंचाने की व्यवस्था शीघ्र की जाएगी। प्रदेश सब्जी, फल एवं फूल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा कि किसानों के लिए मशरूम, सब्जी और फूल चंडीगढ़ और दिल्ली मंडी में बेचने का संकट खड़ा हो गया है।
ढली मंडी में किसान ज्यादा फसलें नहीं बेच सकते। फूल की बिक्री तो बंगलूरू तक होती रही है, लेकिन किसान फूलों को तोड़ नहीं पाए हैं। यही स्थिति मशरूम उत्पादकों और सब्जी उत्पादकों की भी है। सरकार किसानों की समस्या का समाधान शीघ्र करे।