अमर उजाला ने दो दिसंबर के अंक में ‘निर्धनता छात्रवृत्ति योजना के नाम पर गरीबों से मजाक’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से पांचवीं कक्षा के गरीब परिवारों से संबंधित विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही योजना की हकीकत से अवगत कराया था।
पहली से 5वीं कक्षा में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के बच्चों की वित्तीय मदद के लिए शुरू की गई निर्धनता छात्रवृत्ति योजना को अन्य योजना में मर्ज किया जाएगा। सालाना 40 रुपये छात्रवृत्ति देकर गरीब बच्चों का मखौल उड़ा रही सरकार ने संवेदनशील होते हुए इस बाबत संज्ञान ले लिया है। अब आईआरडीपी छात्रवृत्ति योजना में निर्धनता छात्रवृत्ति योजना को मर्ज किया जाएगा।
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आईआरडीपी योजना के तहत सालाना 150 रुपये दी जा रही छात्रवृत्ति बढ़ाकर 500 रुपये करने का सरकार ने फैसला लिया है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने कई अन्य छात्रवृत्ति योजनाओं की राशि बढ़ाने का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा है। सरकार से इसे मंजूरी मिलने के बाद नए शैक्षणिक सत्र से नाममात्र धनराशि वाली छात्रवृत्ति योजनाओं में बजट बढ़ जाएगा।
अमर उजाला ने दो दिसंबर के अंक में ‘निर्धनता छात्रवृत्ति योजना के नाम पर गरीबों से मजाक’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से पांचवीं कक्षा के गरीब परिवारों से संबंधित विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही योजना की हकीकत से अवगत कराया था। वर्ष 1971 में हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद से यह छात्रवृत्ति दी जा रही है। बीते 50 वर्षों में सरकार ने एक बार भी छात्रवृत्ति राशि को बढ़ाने पर विचार नहीं किया है।
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प्रदेश के गठन का स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही सरकार के प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने अब योजना को बदलने की तैयारी शुरू कर दी है। निर्धनता छात्रवृत्ति योजना को आईआरडीपी छात्रवृत्ति योजना में मर्ज करने का फैसला लिया गया है। निदेशालय ने अब गरीब परिवारों के पात्र विद्यार्थियों को 500 रुपये सालाना छात्रवृत्ति देने का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा है।
पहली से पांचवीं कक्षा में साल भर 90 फीसदी हाजिरी पूरी होने दी जाने वाली 20 रुपये की छात्रवृत्ति को भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। शिक्षा सचिव राजीव शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय का प्रस्ताव मिला है। जल्द ही सरकार की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।