राज्य विद्युत नियामक आयोग के नए अध्यक्ष की दौड़ से आईएएस बाहर हो गए हैं। अब दो इंजीनियरों के बीच मुकाबला है। चयन कमेटी ने दो नाम शार्ट लिस्ट कर अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को भेजे हैं। इनमें एक इंजीनियर सेवानिवृत्त और एक अभी सेवारत हैं। सदस्य न्यायिक की नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद सरकार अध्यक्ष के चयन को पहले से ज्यादा सतर्क हो गई है।
आयोग का अध्यक्ष पद एसकेबीएस नेगी के सेवानिवृत्त होने के बाद से खाली है। इसके लिए करीब चालीस लोगों ने आवेदन किया था। इनमें पूर्व मुख्य सचिव, पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव, बिजली बोर्ड के पूर्व प्रबंध निदेशक, बीबीएमबी के पूर्व अध्यक्ष, बिजली बोर्ड के वर्तमान अध्यक्ष, एसएलडीसी से सेवानिवृत्त अधिकारी सहित कई चीफ इंजीनियर शामिल हैं।
ऊर्जा विभाग के सूत्रों के अनुसार सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी इस पद की दौड़ से बाहर हो गए हैं। चयन कमेटी ने दो लोगों के नाम का पैनल मुख्यमंत्री को भेजा है। इसी बीच, आयोग के सदस्य (न्यायिक) की नियुक्ति का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है।
सदस्य पद के लिए आवेदन करने वाले एक आवेदक ने चयन कमेटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उधर, अध्यक्ष पद की नियुक्ति को लेकर अपनाई जा रही प्रक्रिया की आरटीआई से जानकारी मांगी गई है। अध्यक्ष पद के लिए मेरिट का सही से पालन नहीं होने की आशंका को देखते हुए इस नियुक्ति को भी हाईकोर्ट लेकर जाने के लिए आरटीआई के हथियार बनाया गया है।
आरटीआई से मांगा आवेदनों की छंटनी प्रक्रिया के आधार का ब्योरा
विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष पद के लिए कुल आवेदनों में से पैनल के लिए हुई छंटनी प्रक्रिया का ब्योरा आरटीआई से मांगा गया है। एक स्थानीय व्यक्ति ने अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा के कार्यालय में आरटीआई लगाकर पूछा है कि सरकार के जारी विज्ञापन के तहत कितने लोगों ने आवेदन किया? छंटनी प्रक्रिया क्या चयन कमेटी ने की?
शार्ट लिस्ट किए आवेदकों का नाम और बायोडाटा सहित ब्योरा, चयन कमेटी ने छंटनी को क्या आधार बनाया और मेरिट लिस्ट बनाने को कमेटी के सदस्यों ने कितने-कितने अंक दिए, इसकी जानकारी भी मांगी है। वर्ष 2015 में अध्यक्ष पद के लिए आवेदन करने वालों का ब्योरा और छंटनी को अपनाई प्रक्रिया की जानकारी भी मांगी है।