हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय वैसे तो दस साल से अपने भवन के लिए संघर्षरत है, लेकिन इस साल भी मामला शिलान्यास से आगे नहीं बढ़ पाया। 21 फरवरी, 2019 को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सीयू की आधारशिला देहरा और जदरांगल में रखी। पूरा साल बीत जाने के बाद अभी तक सीयू की नींव की खुुदाई शुरू नहीं हो पाई है।
एफसीए केस और डीपीआर बनाने में ही बीत गया। धरातल पर काम शुरू होने में कितना समय लेगा, इस पर अब राजनेता भी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। वर्ष 2009 में शुरू हुए केंद्रीय विवि की वर्तमान में भी देहरा, शाहपुर और धर्मशाला के अस्थायी भवनों में कक्षाएं चल रही हैं। कांगड़ा और धर्मशाला शहर में किराये पर सीयू ने छात्रावास के लिए भवन लिए हैं।
देहरा और जदरांगल में प्रस्तावित है भवन निर्माण
केंद्रीय विवि के लिए कांगड़ा जिला के देहरा में 300 एकड़ भूमि को पर्यावरण मंत्रालय की ओर से भवन निर्माण के लिए मंजूरी मिल चुकी है। लेकिन डीपीआर का मामला अटकने के कारण अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसके अलावा धर्मशाला के समीप जदरांगल में लगभग 681 एकड़ भूमि का केस एफसीए की स्वीकृति के लिए भेजा गया है। फरवरी के बाद एफसीए केस को तैयार करने में भी लगभग छह महीने का समय लगा है।
1400 करोड़ की डीपीआर रिजेक्ट, 337 करोड़ मंजूर
सीयू ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के सहयोग से लगभग 1400 करोड़ रुपये की डीपीआर बनाकर मानव संसाधन मंत्रालय को भेजी थी, जिसे दो महीने पहले मानव संसाधन मंत्रालय ने रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद मानव संसाधन मंत्रालय ने सीयू के भवन के 337 करोड़ के बजट को मंजूर करने का पत्र भेजा। लेकिन सीयू ने इस बजट को कम बताकर और राशि जारी करने के बारे में पत्र भेजा है।
साल में एफसीए समन्वयक के तीन तबादले
धर्मशाला के समीप जदरांगल की 681 एकड़ जमीन को सीयू के नाम करने और एफसीए केस के लिए प्रदेश सरकार ने एचएएस अधिकारी धर्मेश रामोत्रा को समन्वयक तैनात किया था, जब वह एसडीएम धर्मशाला थे। उसके बाद इसी साल उनका तीसरा तबादला कर दिया है, जिसके कारण सीयू का मामला अधर में लटक गया है। लोस चुनाव से पहले उन्हें धर्मशाला से एसडीएम बल्ह भेजा गया। चुनाव के बाद उन्हें शिक्षा बोर्ड का सचिव और अब इसी महीने एसडीएम पालमपुर तैनात किया है।