हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी सेवाएं महासंघ (विनोद गुट) के अध्यक्ष और चालीस संगठनों के संयुक्त महासंघ के मुख्य सलाहकार विनोद कुमार ने संशोधित वेतनमान को लेकर सरकार पर हमला बोला है। कहा कि उनका संगठन प्रदेश के कर्मचारियों के मध्य जाएगा। इससे पहले उनके संगठन के नेता सरकार और अधिकारियों से तीन साल तक संपर्क में रहे, जिससे संशोधित वेतनमान का मसला समय पर सुलझाया जा सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। संशोधित वेतनमान का मामला पेचीदा होता चला गया।
महासंघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने प्रेस क्लब शिमला में कहा कि प्रदेश के ढाई लाख कर्मचारियों से जुड़े बड़े मसले हैं। सरकार इन्हें सुलझाने में विफल रही है। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के कर्मचारियों को बांटने का प्रयास किया गया। सरकार महासंघ के चुने हुए नेताओं को नहीं मानेगी तो कर्मचारी जवाबदेही तय करेंगे।
कहा कि तीन साल तक सरकार को मनाने का प्रयास किया गया, लेकिन सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। पे कमीशन लागू करने का मामला सरकार से उठाया जाता रहा। सात साल बाद भी इसे सही तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।
कहा कि कर्मचारियों के सही प्रतिनिधियों को सरकार ने आमंत्रित नहीं किया। यही विवाद का सबसे बड़ा कारण है। यही कारण है कि विभागों के 40 कर्मचारी संगठनों ने मिलकर संयुक्त महासंघ गठित किया और ये अपना विरोध दर्ज करने को विवश हैं। महासंघ का अपना संविधान है और इससे बाहर नहीं जा सकते। सात साल के बाद वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू कर रहे हैं। क्षेत्रवाद को जबरन थोपा जा रहा है।