पुलिस कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को लिखे खुले पत्र में कहा है कि हर वर्ष 5 करोड़ दिए जाने के बाद भी पुलिस कर्मचारियों को एचआरटीसी की बसों में फ्री यात्रा का टैग क्यों लगाया जा रहा है। एचआरटीसी के घाटे की वजह हिमाचल पुलिस नहीं, बल्कि एचआरटीसी का स्टाफ खुद है। पत्र में लिखा गया है कि हर महीने पुलिस कर्मचारियों के वेतन से 210 रुपये की कटौती होती है। महीने की यह रकम 40 लाख बनती है और साल में 5 करोड़ की राशि एचआरटीसी को दी जाती है। ऐसे में यह यात्रा फ्री कैसे हुई?
कैबिनेट की बैठक के बाद उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सरकार ने पुलिस की एचआरटीसी बसों में फ्री यात्रा को बंद किया है। ये तथ्यों के विपरीत है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि मंत्री की ओर से बोले गए फ्री यात्रा के शब्दों ने आमजन में यह धारणा बन गई है कि पुलिस कर्मचारी मुफ्त यात्रा करते है। 20 फीसदी पुलिस कर्मचारी ही ड्यूटी के संदर्भ में एचआरटीसी की बसों में सफर करते हैं। 80 फीसदी पुलिस जवान ड्यूटी के लिए पुलिस विभाग की गाड़ियों या निजी वाहनों में सफर करते हैं। इस सुविधा को बंद करने से नहीं लगता है कि एचआरटीसी को कोई मुनाफा होना वाला है। पुलिस कर्मचारी जहां भी राजकीय कार्य से यात्रा करता है, उसमें वाहनों का ही प्रयोग किया जाता है। इसके लिए यात्रा भत्ते का क्लेम नहीं किया जाता है। इस सुविधा के बंद होने से प्रत्येक कर्मचारी अपनी सरकारी यात्रा का क्लेम करेगा। ऐसा होने से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।