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हिमाचल पुलिस का फैसला: स्कूलों के बाहर सुरक्षा का घेरा होगा मजबूत, कैमरे नहीं लगे तो कार्रवाई

Sat, 24 Oct 2026 06:16 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्कूल परिसरों के साथ-साथ उनके प्रवेश द्वारों और संपर्क मार्गों पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
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डीजीपी अशोक तिवारी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्कूल परिसरों के साथ-साथ उनके प्रवेश द्वारों और संपर्क मार्गों पर भी सीसीटीवी कैमरे लगाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। डीजीपी अशोक तिवारी ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने और सभी खामियों को आगामी 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से दुरुस्त करने को कहा है। निर्देशों को लेकर लापरवाही बरती गई तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने अभिभावकों और स्कूलों से बच्चों को आपातकालीन हेल्पलाइन 112 के उपयोग के प्रति जागरूक करने का भी आह्वान किया है। प्रदेश भर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों और मुख्य अध्यापकों को लिखित निर्देश भेजे हैं।

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डीजीपी ने पिछले साल शिमला के बीसीएस स्कूल के गेट के पास से तीन छात्रों के अपहरण की घटना की याद दिलाते हुए कहा कि हालांकि उन बच्चों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया था, लेकिन उस घटना ने बाहरी सुरक्षा उपायों की महत्ता को सामने ला दिया था। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि केवल स्कूल परिसर के भीतर कैमरे लगा देना सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। स्कूल के मुख्य प्रवेश और निकास द्वारों, वहां तक आने-जाने वाले रास्तों, आसपास के इलाकों और वाहनों व व्यक्तियों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए गेट के दोनों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य है।
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इसके साथ ही स्कूलों को कैमरों के नियमित रखरखाव, सीसीटीवी फुटेज की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने, हर आगंतुक की पहचान दर्ज करने और स्कूल खुलने व छुट्टी के समय गेट पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन सभी व्यवस्थाओं को अगले 30 दिनों में पूरा करना होगा। पुलिस का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और बच्चों को इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) 112 के बारे में बताएं। प्रदेश स्तरीय अभियान में अगले माह नवंबर के पहले हफ्ते में शिमला के निजी स्कूलों के प्रिंसिपलों के साथ पुलिस मुख्यालय में एक बैठक भी होगी।
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