कांगड़ा के परौर केंद्र में 13 लोगों की गिरफ्तारी के बाद पूरे प्रदेश में रद्द हुई पुलिस भर्ती लिखित परीक्षा अब नवंबर तक नहीं हो सकेगी। इसके पीछे दोबारा परीक्षा करवाने की तैयारियाें में लगने वाले समय, पुलिस जांच, संभावित विधानसभा उपचुनाव की आचार संहिता और धर्मशाला इन्वेस्टर मीट की वजह बताई जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि इसके अलावा मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह देशभर में परीक्षा पैटर्न का अध्ययन करें। उनमें से जो हिमाचल के लिए उचित हो उसे लागू करते हुए ही परीक्षा कराएं। ऐसे में परीक्षा कराने में समय लग सकता है।
परीक्षा कराने के लिए प्रश्नपत्र तैयार कराने से लेकर उन्हें छपवाने, ओएमआर शीट, अटेंडेंस शीट के लिए करीब बीस दिन का समय लगेगा। परीक्षा पैटर्न का अध्ययन कर अपने परीक्षा मॉड्यूल को उस तरह लागू करना सितंबर से पहले नहीं होगा। सितंबर अंत तक उपचुनाव की अधिसूचना और आचार संहिता लागू हो सकती है। अक्तूबर में त्योहार, नवंबर में ग्लोबल इनवेस्टर मीट प्रस्तावित है।
दोबारा परीक्षा में नहीं ली जाएगी अतिरिक्त फीस
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पुलिस विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतियोगी परीक्षा के लिए अपनाई जाने वाली बेहतर प्रणाली का प्रयोग करें। इसी आधार पर पुलिस भर्ती के लिए दोबारा लिखित परीक्षा का आयोजन करें। इसके लिए उम्मीदवारों को कोई अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी।
पुलिस को शुरूआती जांच में जिस तरह के साक्ष्य मिले हैं उससे साफ है कि गड़बड़ी करने वाले मुख्य आरोपी ने पहली बार किसी परीक्षा में सॉल्वर की व्यवस्था या नकल नहीं कराई है। चूंकि पिछले कुछ सालों में वह अमीर बन गया है। ऐसे में पिछले समय में हुई विभिन्न विभागों की लिखित परीक्षाओं में भी गड़बड़ी कराने में उसका हाथ होने से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस उस मुख्य आरोपी को पकड़ने में है, जिसने परीक्षार्थियों से संपर्क साधा और उनसे पैसा लेकर नकल कराने के लिए हरियाणा और यूपी से लोगों को बुलवाया।
शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मुख्य आरोपी बिक्रम ने पिछले दो तीन सालों में काफी संपत्ति अर्जित की है। ऐसे में अचानक इस संपत्ति की बढ़ोतरी ने पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार पकड़े गए आरोपियों से इस बात की भी पूछताछ की जा रही है कि इस परीक्षा के अलावा वह किस किस और परीक्षा में बैठे थे। चूंकि इन फर्जी परीक्षार्थियों का संपर्क बिक्रम से ही रहता था, इसलिए माना जा रहा है कि इस मामले में अभी कई और लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर सकती है और उसके बाद ही पुलिस पूरी कहानी को खोल पाएगी।
नाम न लिखने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस की भर्ती के दौरान तलाशी और सख्ती के बाद कैमरा डिवाइस और ईयर डिवाइस लेकर डमी कैंडिटेड बैठ रहे हैं तो अन्य विभागों की परीक्षाओं में तो सिर्फ एडमिट कार्ड की मदद से कैंडिडेट सीधे परीक्षा हाल तक पहुंच जाते हैं। जाहिर है कि आधुनिक उपकरणों की मदद से उन परीक्षाओं में भी नकल हुई हो और इसकी भनक ही न लगी हो। अधिकारी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद कई बड़ी जानकारियां सामने आ सकती हैं।