अधिकांश साइबर ठगी केवल सावधानी, जागरूकता और समय पर सत्यापन से रोकी जा सकती है। उन्होंने लोगों से किसी भी संदिग्ध कॉल, संदेश या ऑनलाइन प्रस्ताव पर घबराने से बचने, गोपनीय जानकारी साझा न करने और किसी भी साइबर घटना की स्थिति में तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचित करने की अपील की। अपराधी मानसिक दबाव और घबराहट का फायदा उठाकर लोगों का विश्वास जीतने की कोशिश कर रहे हैं। कई मामलों में पढ़े-लिखे और डिजिटल रूप से जागरूक लोग भी जल्दबाजी, डर या जानकारी के अभाव में साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं।
साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह डिजिटल अनुशासन, जिम्मेदार स्मार्टफोन उपयोग और जनजागरूकता से जुड़ा विषय बन चुका है। राठौर ने लोगों को फर्जी बैंक, पुलिस, कुरिअर सेवा या सरकारी एजेंसी बनकर आने वाली कॉल से सतर्क रहने की सलाह दी। साथ ही व्हाट्सएप, संदेश सेवा या सामाजिक माध्यमों के जरिये भेजी जाने वाली एपीके फाइल और संदिग्ध लिंक डाउनलोड न करने को को लेकर भी आगाह किया है। साइबर विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि स्क्रीन साझा करने वाले अनुचित प्रयोगों के जरिये साइबर ठग मोबाइल बैंकिंग तक पहुंच बना सकते हैं। इसी तरह कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) आधारित नकली आवाज और वीडियो तकनीक का उपयोग कर रिश्तेदारों या परिचितों के नाम पर आर्थिक ठगी की जा रही है।
लोगों को दोगुना पैसा, उच्च लाभ निवेश और गारंटी लाभ जैसे दावों वाली फर्जी निवेश योजनाओं से भी बचने की सलाह दी गई। क्यूआर कोड स्कैन करते समय पूरी सावधानी बरतने और फर्जी ग्राहक सेवा नंबरों से सतर्क रहने को कहा गया। सुरक्षा उपायों के तहत केवल आवश्यकता होने पर ही लोकेशन चालू रखने, व्हाट्सएप समूह गोपनीयता सेटिंग सुरक्षित रखने, अनजान वीडियो कॉल और स्क्रीन साझा करने के अनुरोध से बचने तथा ब्लूटूथ, एनएफसी और हॉटस्पॉट उपयोग के बाद बंद रखने की सलाह दी गई।
किसी भी साइबर ठगी या संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर सहायता नंबर 1930 पर देने को कहा गया। इसके अलावा व्हाट्सएप, जीमेल, सामाजिक माध्यम और बैंकिंग अनुप्रयोगों में दो-स्तरीय सत्यापन सक्रिय रखने, जुड़े उपकरणों की नियमित जांच करने तथा ओटीपी, यूपीआई पिन, पासवर्ड, एटीएम पिन और सीवीवी किसी के साथ साझा न करने की अपील की गई।