भाजपा खेमे ने इस जीत को संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं की मेहनत की जीत बताया है। लखबीर सिंह लक्खी पहले भी जिला परिषद सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा वह भाजपा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के मंडल संयोजक भी जिम्मेदारी भी निभा रहे। वह लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय राजनीति कर रहे हैं। भाजपा नेताओं का दावा है कि यह परिणाम बताता है कि केवल बड़े विकास के दावे या सरकारी पद का प्रभाव ही चुनाव नहीं जिताता, बल्कि जमीनी संपर्क और स्थानीय मुद्दों की समझ ज्यादा महत्वपूर्ण होती
उपमुख्यमंत्री के लिए मानी जा रही बड़ी राजनीतिक चोट
राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह हार इसलिए अधिक चर्चा में है, क्योंकि चुनाव उपमुख्यमंत्री की गृह पंचायत में हुआ। जिस क्षेत्र को उनका राजनीतिक किला माना जाता था, वहीं कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार की हार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ समय से उपमुख्यमंत्री का पूरा फोकस हरोली विधानसभा क्षेत्र में बड़े विकास कार्यों, घोषणाओं और राजनीतिक विस्तार पर रहा। विकास की गंगोत्री उनका प्रमुख राजनीतिक नारा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर पंचायत राजनीति और व्यक्तिगत संपर्कों को पर्याप्त महत्व नहीं मिलने का असर अब सामने आने लगा है। चुनाव के दौरान उपमुख्यमंत्री ने जिला परिषद चुनावों में जमकर प्रचार भी किया था, इसलिए इस परिणाम को सीधे उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस संगठन में बढ़ सकती है अंदरूनी बेचैनी
इस हार के बाद कांग्रेस समर्थकों में निराशा साफ दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर भी यह चर्चा शुरू हो गई है कि स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक तालमेल कमजोर पड़ा है। हरोली विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से मुकेश अग्निहोत्री का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। यहां से मुकेश अग्निहोत्री लगातार पांचवीं बार विधायक बनने के बाद प्रदेश के पहले उपमुख्यमंत्री बने हैं, लेकिन भाजपा की यह जीत संकेत दे रही है कि पार्टी अब स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी हुई है।