हिमाचल प्रदेश में अप्रैल से कई क्षेत्रों में सूखे से सैकड़ों पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं और लोग जरूरत के पानी को तरस गए हैं। कई इलाकों में पेयजल स्रोतों का पानी सूख गया है। प्रदेश में वर्तमान में साढ़े नौ हजार स्कीमों से लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।
प्रदेश में स्रोत सूखने की ऐसी स्थिति मई और जून में गर्मी बढ़ने से पैदा होती थी। बर्फबारी और बारिश कम होने से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों पर मार पड़ी है। इन स्रोतों पर पेयजल के लिए पूरी तरह से आश्रित आबादी को पानी की आपूर्ति के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में सूखे से कुल 708 पेयजल स्कीमें प्रभावित हुई हैं। पचास से अस्सी फीसदी घटे पानी वाली अस्सी पेयजल स्कीमें हैं।
पेयजल आपूर्ति को न टैंकर लगाए, न नए हैंडपंप स्थापित किए
अभी तक सरकार ने पानी की आपूर्ति के लिए टैंकर नहीं लगाए हैं और न ही पेयजल संकट से निपटने के लिए कोई नया हैंड पंप स्थापित किया है।
कहां-कितनी पेयजल स्कीमें प्रभावित
जलशक्ति विभाग के आंकड़ों के अनुसार कुल 708 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। शिमला जोन में 401, मंडी जोन 222, हमीरपुर जोन 12 और धर्मशाला जोन में 73 पेयजल स्कीमों पर सूखे की मार पड़ी है। जिन योजनाओं में 50 से 75 फीसदी पानी घटा है, उनकी संख्या अस्सी हैं। इनमें शिमला जोन 45, मंडी जोन 32, हमीरपुर जोन शुन्य और धर्मशाला जोन में तीन स्कीमें शामिल हैं।
शिमला जोन में 18, मंडी जोन में 10 और धर्मशाला जोन में कुल 3 पेयजल स्कीमों में 75 फीसदी तक पानी घटा है। इसके अलावा 396 स्कीमों में 25 फीसदी, 201 स्कीमों में 50 फीसदी, 75 फीसदी तक 80, 75 से अधिक 31 पेयजल स्कीमों में पानी घटा है।
जलशक्ति विभाग के इंजीनियर इन चीफ नवीन पुरी ने कहा कि 708 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।