क्या आपके नमक में आयोडीन है? यह सवाल इसलिए जरूरी है, क्योंकि प्रदेश के सरकारी डिपुओं में मिलने वाले सस्ते नमक में आयोडीन की मात्रा न के बराबर है। इसका खुलासा आशा वर्करों की ओर से किए एक सर्वे में हुआ है। आशा वर्कर एमबीआई किट से घर-घर जाकर नमक में आयोडीन की मात्रा चेक कर रही हैं, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। डिपो के नमक में कहीं तो आयोडीन की मात्रा 0 फीसदी है तो कहीं 5 से 10 फीसदी है, जबकि यह 15 फीसदी से ज्यादा होनी चाहिए।
प्रदेश के डिपुओं में मिलने से राशन के बाद अब नमक पर भी सवाल उठने लगे हैं। कोरोना काल में विशेषज्ञ इम्यूनिटी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं और सरकार की ओर से मिलने वाले नमक में आयोडीन की मात्रा कम है। चिकित्सकों का कहना है कि आयोडीन की कमी से जहां बच्चों का मानसिक विकास नहीं हो पाता वहीं लोगों को थायरॅायड और घेंगा जैसी गंभीर बीमारियां भी होने लगती हैं।
प्रदेश में करीब 18.5 लाख राशन कार्डधारक उपभोक्ता हैं। सरसों तेल, दालों के अलावा उपभोक्ता डिपो से मिल रहा नमक खाते हैं। परीक्षण का परिणाम जानने के बाद आशा वर्कर लोगों को डिपो का नमक न खाने की सलाह दे रही हैं। हेल्थ सुपरवाइजर सीएचसी पंजगाईं जगदीश ने बताया कि आशा वर्करों ने सीएचसी पंजगाईं के तहत ग्राम पंचायत धार टटोह, बरमाणा, हरनोड़ा, दयोली, पंजगाईं, धौण कोठी सहित कई पंचायतों में इसका सर्वे किया है, जिसमें आयोडीन की नमक में कम मात्रा का खुलासा हुआ है। सर्जन डॉ. ऋषि नभ ने भी बताया कि कम आयोडीन वाला नमक खाना सेहत के लिए हानिकारक है।
अगर डिपो के नमक में इस तरह की खामियां हैं और लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है तो इस मामले की कड़ाई से जांच की जाएगी। नमक की आपूर्ति करने वाली कंपनी पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- राजेंद्र गर्ग, खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री