सुप्रीम कोर्ट से एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां रद्द करने के आदेशों पर लगी रोक से अब प्रदेश में इन शिक्षकों की पूर्व की तरह सेवाएं जारी रह सकेंगी। जनवरी 2020 से लंबित वेतन भी शिक्षकों को जारी होने की उम्मीद है। सरकार ने इस साल एसएमसी शिक्षकों को सेवा विस्तार नहीं दिया है। इसके बावजूद शिक्षक ऑनलाइन पढ़ाई में सहयोग दे रहे हैं। बीते दिनों सरकार ने शिक्षकों का लंबित वेतन देने को लेकर हाईकोर्ट से मंजूरी मांगी थी।
हाईकोर्ट ने सरकार के आग्रह को यह कहकर नकार दिया था कि अगर वेतन देने की मंजूरी दी जाती है तो यह लगेगा कि हाईकोर्ट इन नियुक्तियों के पक्ष में है। अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट के नियुक्तियां रद्द करने के फैसले पर लगी रोक से वेतन जारी करने की राह भी आसान हो गई है। हिमाचल में एसएमसी से शिक्षकों की भर्ती प्रो. प्रेम कुमार धूमल की सरकार में शुरू हुई थी।
धूमल सरकार ने साल 2011-12 में करीब 250 शिक्षकों को एसएमसी से प्रदेश के दुर्गम और दूरदराज क्षेत्रों के स्कूलों में नियुक्त किया था। सत्ता परिवर्तन होने पर कांग्रेस सरकार ने 2017 में करीब 2100 शिक्षकों की भर्ती कर इस प्रथा को कायम रखा। फिर सत्ता बदलने पर जयराम सरकार ने 2018 में 250 शिक्षक भर्ती किए। वर्तमान में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कुल 2555 एसएमसी शिक्षक सेवाएं दे रहे थे।
इनमें 770 पीजीटी, 590 टीजीटी और शेष सीएंडवी व जेबीटी हैं। एसएमसी से शिक्षक भर्ती का मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर सरकार ने अगस्त 2019 में भर्ती बंद कर दी थी। सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया था कि कोर्ट के आगामी आदेशों तक सरकारी स्कूलों में नए एसएमसी अध्यापक की नियुक्ति अथवा चयन नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने स्टॉप गैप अरेंजमेंट के नाम पर की जा रही एसएमसी भर्तियों को प्रशंसनीय कदम नहीं बताने की तल्ख टिप्पणी की थी। सरकार ने दिसंबर 2018 में स्कूलों में रिक्त पदों पर एसएमसी से भर्ती करने के आदेश जारी किए थे। सामान्य क्षेत्रों में छह माह और जनजातीय क्षेत्रों में तीन माह से रिक्त पदों पर एसएमसी से शिक्षक भर्ती को कहा गया था। जुलाई 2019 में इसकी अधिसूचना जारी हुई थी।