मंडी जिले के मोतीपुर में छह मंजिला संस्कृति सदन बनकर तैयार है। करीब 30 करोड़ की लागत से आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण संस्कृति सदन में छोटी काशी की संस्कृति की झलक मिलेगी। आर्ट गैलरी और म्यूजियम में आगंतुक देवी-देवताओं के प्राचीन इतिहास और देव यंत्रों को जान सकेंगे।
रियासतकाल के बाद पहली बार 226 पंजीकृत देवी-देवताओं, देवलुओं समेत एक हजार लोगों को एक ही छत के नीचे एक सारी सुविधाओं के साथ ठहरने की व्यवस्था होगी। संस्कृति सदन का काम 90 फीसदी से अधिक पूरा हो चुका है। अक्तूबर तक शेष बचे कार्य को पूरा कर लिया जाएगा। 2022 के अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव में देवी-देवता इस आलीशान भवन में विराज सकेंगे।
226 देवी-देवताओं के साथ देवलुओं को भी ठहरने की सुविधा
संस्कृति सदन मोतीपुर का निर्माण पूरा होने से देव समाज में हर्ष है। अब यहां सांस्कृतिक गतिविधियां एक साथ हो सकेंगी। हजार लोग एक साथ ठहर सकेंगे। देवी-देवताओं और देवलुओं को शिवरात्रि पर्व के दौरान आने वाली परेशानियों से निजात मिलेगी। - शिवपाल, प्रधान सर्व देवता सेवा समिति मंडी
संस्कृति सदन का अधिकांश कार्य पूर्ण हो गया है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि इस बार अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि में सभी देवी-देवताओं और श्रद्धालुओं को एक छत के नीचे ठहरने की सुविधा मिले। छह मंजिला भवन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। प्राचीन मंडी की झलक के साथ देवी-देवताओं का इतिहास भी लोग जान सकेंगे। मंडी में संस्कृति सदन सांस्कृतिक गतिविधियों का हब बनेगा। - अरिंदम चौधरी, डीसी मंडी
धरातल मंजिल में होगा मल्टीपर्पज हाल
बेसमेंट : स्टोर, रेजिडेंशियल स्पेस, डाइनिंग, रसोई घर और शौचालय होंगे
धरातल : 675 लोगों की क्षमता वाला मल्टीपर्पज हाल मंच के साथ, कार्यालय, सांस्कृतिक कार्यक्रम करने वालों को तैयार होने के लिए कमरा, शौचालय
पहली मंजिल : 156 लोगों की क्षमता वाली बालकनी, आर्ट गैलरी, म्यूजियम, शौचालय
दूसरी मंजिल : 19 लोगों की क्षमता वाली डोरमेट्री, ड्राइंग हाल, किचन, डाइनिंग हाल, शौचालय
तीसरी मंजिल : 26 लोगों की क्षमता वाली डोरमेट्री, शौचालय
चौथी मंजिल : आठ सूट (आलीशान कमरे) और स्टोर
चार बीघा जमीन में बन रहा संस्कृति सदन
मोतीपुर में चामुंडा मंदिर परिसर के नजदीक 2015 में संस्कृति सदन का काम शुरू हुआ था। इसकी आधारशिला पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह ने रखी थी। इसके बाद सीएम जयराम ठाकुर ने संस्कृति सदन की योजना को अधिक समृद्ध किया और जरूरत अनुसार संशोधन किया। संस्कृति सदन यानी देव सदन के कार्य को 2021 महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए तैयार करने की योजना थी लेकिन भवन निर्माण में थोड़ा बदलाव होने के कारण अधिक समय लग गया। यह चार बीघा जमीन पर बन रहा है।
सात दशक से नहीं मिली छत
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव मंडी में शिरकत करने वाले देवी-देवताओं को राजवाड़ी प्रथा खत्म होने के करीब सात दशक बाद भी स्थायी ठिकाना नहीं मिल सका है। इस कारण देवी-देवता और देवलुओं को यहां वहां भटकना पड़ता है। मंडी में रजवाड़ों के समय से महाशिवरात्रि महोत्सव का आयोजन हो रहा है। सात दिवसीय महोत्सव में जिले के विभिन्न स्थानों से 200 से अधिक देवी-देवता देवलुओं और कारदारों के साथ शिरकत करते हैं। इस दौरान उन्हें अलग-अलग जगहों पर ठहरने की व्यवस्था होती है। न सोने को और न खाने को सही स्थान मिल पाता है।