शिमला-मटौर फोरलेन का टेंडर 15 नवंबर तक भी नहीं हो पाया है। एनएचएआई का कहना है कि केंद्रीय भूतल मंत्रालय ने इसका टेंडर इसकी लागत के रेट रिवाइज करने के बाद करने की बात कही है। पिछले करीब तीन साल से एनएचएआई शिमला-मटौर फोरलेन का टेंडर करने व 2022 तक इस फोरलेन को धरातल पर उतारने का दावा कर रही थी।
परंतु अभी तक एक फेज का टेंडर भी नहीं हो पाया है। पहले कोरोना फिर 90 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण की शर्त व अब इसके रिवाइज रेट करने के कारण इसके फेज 5 धर्मशाला से ज्वालामुखी का 15 नवंबर तक होने वाला टेंडर लटक गया है। पांच पैकेज के इस फोरलेन के बनने से हिमाचल आने वाले पर्यटकों को बेहतर सड़क सुविधा मिलनी थी।
लेकिन इस फोरलेन का अभी एक टेंडर भी नहीं हो पाया है। इस कारण इस फोरलेन की जद में आने वाले भवन व भू मालिक असमंजस की स्थिति में हैं। लोगों में अपने जमीन व आशियानों के उजड़ने का डर है। वहीं काम में लेटलतीफी होने के कारण लोग न तो नए आशियाने बनाने व न ही दूसरी जगह जमीन खरीदने के बारे में कोई फैसला ले पा रहे हैं।
इस फोरलेन की जद में आने वाले भू मालिकों बीडी शर्मा, अनिल शर्मा, प्यारेलाल, राजीव व अन्यों का कहना है कि सरकार को इस फोरलेन के कार्य में तेजी लानी चाहिए। वहीं, शिमला-मटौर फोर लेन परियोजना के निदेशक वाईए राउत ने बताया कि इस फोरलेन के धर्मशाला से ज्वालामुखी का टेंडर 15 नवंबर तक होना प्रस्तावित था। लेकिन भूतल मंत्रालय ने अब इसकी लागत के रेट रिवाइज करने की बात कही है। अब यह टेंडर 15 दिसंबर तक होने की संभावना है।