25 अक्तूबर से शुरू होने वाले सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में पहली बार देवी देवताओं के देवलुओं से ज्यादा पुलिस का पहरा होगा। उत्सव में होने वाली रथयात्रा में मात्र 200 लोग ही शामिल होंगे जबकि दशहरा की सुरक्षा में पुलिस और होमगार्ड के 635 जवानों की तैनाती होगी। दशहरा में कोरोना नियमों में 200 लोगों के भागीदारी में तीन गुना अधिक सुरक्षा व्यवस्था होगी। सुरक्षा को लेकर पुलिस महकमे ने पूरी तैयारी शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि 23 और 24 अक्तूबर तक प्रदेश की विभिन्न पुलिस बटालियनों से पुलिस के यह जवान ढालपुर पहुंच जाएंगे। दशहरा में पिछले दो दशक से देवी देवताओं की संख्या हर बढ़ती जा रही है। इस दौरान 200 देवी देवताओं के देवरथों से 2019 में यह संख्या 280 तक पहुंच गई थी। ऐसे में दशहरा उत्सव में देवी देवता के करीब 30 से 40 हजार कारकून, हारियान और देवलु शिरकत करते हैं और सात दिन तक पूरा वातावरण देवलोक में तबदील हो जाता है।
मगर कोरोना के चलते इस बार का दशहरा उत्सव न केवल ऐतिहासिक होगा बल्कि युवा पीढ़ी कुल्लू दशहरा को कई दशकों तक याद रखेंगे। उत्सव के लिए मात्र दो दिन का समय रह गया है, बावजूद रौनक गायब है। दशहरा को लेकर न तो कोई खास तैयारियां हैं और और न लोगों में उत्साह का माहौल है।
उधर, रथ मैदान को रथयात्रा के लिए सजाने का काम युद्घस्तर पर चला है। पुलिस अधीक्षक कुल्लू गौरव सिंह ने कहा कि दशहरा के लिए 23 अक्तूबर से बटालियन से पुलिस के जवानों का पहुंचना शुरू होगा। उपायुक्त डॉ. ऋचा वर्मा ने कहा कि दशहरा में मात्र देव परंपरा का निभाया जाएगा। भगवान रघुनाथ की रथयात्रा में मात्र 200 लोग ही शामिल होंगे।