मक्की की फसल को बचाने के लगाया गया फनल ट्रैप।
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फॉल आर्मी कीट से मक्की की फसल को बचाने के लिए अब फनल ट्रैप का प्रयोग होगा। कृषि विभाग की ओर से किसानों को यह फनल ट्रैप बांटे जा रहे हैं। विभाग की ओर से गठित सर्वे कमेटी ने कीट विज्ञान विशेषज्ञों की सहायता से जिलेभर में फसलों का निरीक्षण कर 600 किसानों को यह फनल ट्रैप बांटे हैं। वर्तमान समय में जिलेभर में 842.5 हेक्टेयर भूमि में 2.88 फीसदी मक्की की फसल में फॉल आर्मी कीट लगा हुआ है।
इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। कृषि विभाग की ओर से किसानों को फॉल आर्मी कीट से बचाव के के लिए दवाई भी प्रदान की जा रही है। अधिकांश क्षेत्रों में कीटनाशक दवाइयां असर नहीं कर रही हैं। इसके चलते विभाग की ओर से किसानों को यह फनल ट्रैप बांटे जा रहे हैं।
ऐसे ट्रैप होता है कीट
फनल ट्रैप कीट पतंगों की एक विस्तृत श्रृंखला को इकट्ठा करने के लिए उपयोग किए जाने वाले अत्यधिक बहुउद्देशीय जाल है। फनल ट्रैप में आमतौर पर जाल के बीच से नीचे तक कीटों को खाने के लिए भोजन लगा होता है, कीट भोजन के लिए संग्रह कंटेनर से होते हुए अंदर जाकर एक कीटनाशक पट्टी में फंस जाते हैं।
जिसके उपरांत कीट फसल तक नहीं पहुंच पाते। एक बार जाल में फंसने के बाद कीट बाहर नहीं आ सकते और विशेषज्ञों के लिए कीटों का पता लगाना, गिनना और पहचानना आसान होता है। वहीं किसानों को यह ट्रैप 30 दिन में एक बार बदलना होता है।
मक्की की फसल को फॉल आर्मी वर्म कीट से बचाने के लिए किसानों को फनल ट्रैप बांटे जा रहे हैं। जिले के छह विकास खंडों के करीब 600 किसानों को मिले यह बांटे जा चुके हैं।
- अतुल डोगरा, उपनिदेशक, कृषि विभाग हमीरपुर।