प्रदेश में जंगली मशरूम का सबसे अधिक सेवन कुल्लू, शिमला, मंडी, चंबा, किन्नौर और सिरमौर में किया जाता है। विश्वभर में मशरूम की 14 हजार से अधिक प्रजातियां हैं।
हिमाचल में कौन सी जंगली मशरूम खाने लायक है और कौन सी विषैली, इसके बारे में अब जल्द पता चलेगा। प्रदेश में जंगली मशरूम की तीन हजार किस्में हैं, इनमें से 300 पर शोध किया जा रहा है। सोलन के चंबाघाट स्थित खुंब अनुसंधान निदेशालय में पहली बार बड़ी संख्या में जंगली मशरूम शोध किया जा रहा है। दो से तीन महीने में शोध कार्य पूरा हो जाएगा।
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इसके बाद निदेशालय विषैली और खाने लायक मशरूम की जानकारी सार्वजनिक करेगा। हिमाचल में जंगली मशरूम खाने से हर साल कोई न कोई जान गंवा रहा है। इसको देखते हुए ही खुंब निदेशालय जंगली मशरूम पर शोध कर रहा है, ताकि विषैली मशरूम से किसी की जान न जाए।
प्रदेश में जंगली मशरूम का सबसे अधिक सेवन कुल्लू, शिमला, मंडी, चंबा, किन्नौर और सिरमौर में किया जाता है। विश्वभर में मशरूम की 14 हजार से अधिक प्रजातियां हैं। इनमें से तीन हजार हिमाचल में पाई जाती हैं। खाने लायक मशरूम की बात करें तो इनमें से कम ही हैं। लगभग 30 प्रतिशत ऐसी प्रजातियां हैं जो जहरीली होती हैं। खुंब निदेशालय ने वर्ष 2021 में जंगली मशरूम की 500 प्रजातियों की खोज की थी।
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इसमें से 30% खाने योग्य निकली थीं। खुंब अनुसंधान निदेशालय के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि जंगली मशरूम पर शोध कर पता लगाया जाएगा कि कितनी तरह की मशरूम खाने योग्य हैं। जंगली मशरूम को खाने से बचना चाहिए।
सबसे जहरीली है अमानिटा मशरूम
अब तक के शोध में पता चला है कि अमानिटा प्रजाति की मशरूम सबसे अधिक जहरीली होती है। इस मशरूम को खाने से 24 घंटे में व्यक्ति की मौत हो सकती है। जबकि अन्य जहरीली मशरूम से पेट दर्द, दस्त, उल्टी, पेट में ऐंठन और बार-बार दस्त की समस्या होती है। किंग बोलीट, पाइन मशरूम, गुच्छी मशरूम, सीप मशरूम, सल्फर शेल्फ मशरूम सबसे अधिक खाई जाने वाले जंगली मशरूम हैं।