नियुक्ति की तारीख से वरिष्ठता लाभ नहीं मिलने पर अनुबंध नियमित कर्मचारी संगठन के तेवर कड़े हो गए हैं। संघ ने दो टूक कहा कि अनुबंध सेवाकाल दो वर्ष करने से भाजपा के वोट बैंक में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी। प्रदेश के 70 हजार से अधिक कर्मचारियों को वरिष्ठता लाभ नहीं देने पर सरकार को वर्ष 2022 के चुनावों में नुकसान उठाना पड़ेगा। संघ ने सरकार से पूछा है कि आठ से तीन वर्षों तक अनुबंध पर रहने वाले कर्मचारियों को किस बात की सजा दी जा रही है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष मुनीष गर्ग और महामंत्री अनिल सेन का कहना है कि अनुबंध सेवाकाल से वरिष्ठता का लाभ देने के लिए अगर कमेटी का गठन करना ही था तो एक महीने पहले ही इसका गठन क्यों नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि करीब 3 वर्ष पहले धर्मशाला के जोरावर मैदान में एनपीएस की रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने ओपीएस पर कमेटी गठित करने की बात कही थी, लेकिन उस कमेटी का गठन आज तक नहीं हो पाया है। उन्होंने आशंका जाहिर की कि कहीं वरिष्ठता के मसले पर भी ऐसा ही न हो।
उन्होंने कहा कि सरकारें अनुबंध काल 8 से 6, 6 से 5, 5 से 3 और 3 से 2 वर्ष तो करती रहीं और वरिष्ठता नियमितीकरण की तारीख से देती रहीं। इसमें उन कर्मचारियों का क्या कसूर जिन्होंने 8 वर्ष, 6 वर्ष, 5 वर्ष और 3 वर्ष का लंबा अनुबंध काल काटा है। यह कर्मचारी वरिष्ठता न मिलने से सरकार से नाराज हैं। इनकी संख्या करीब 70 हजार है। इसका खामियाजा प्रदेश सरकार को 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों में उठाना पड़ सकता है। ऐसे में सरकार को अति शीघ्र अनुबंध से नियमित कर्मचारियों को वरिष्ठता देने की घोषणा करनी चाहिए।