सामरिक, सुरक्षा और पर्यटन के लिहाज से बनने वाली बिलासपुर-बैरी-लेह रेललाइन 500 मीटर से शुरू होकर 5,360 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचाएगी। खास बात यह है कि मनाली से लेह तक हर 40 मीटर चलने के बाद रेल 1 मीटर ऊंचाई पर पहुंचेगी। यह सफर पर्यटकों के लिए रोमांच और खूबसूरती से भरा हुआ होगा। वहीं, उत्तर रेलवे ने इसका लेडार सर्वे पूरा कर सुरक्षा रिपोर्ट सहित इसे रक्षा मंत्रालय को सौंप दिया है।
वहां से इसे आगामी कार्रवाई के लिए हैदराबाद कार्यालय भेजा गया है। उक्त रेललाइन के सर्वे पर लेह पहुंची उत्तर रेलवे की टीम ने 14 से लेकर 18 अक्तूबर तक उपशी से सरचू तक का रिफाइन अलाइनमेंट सर्वे पूरा कर लिया है। यह देश का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जो विश्व की एडवांस तकनीक से बनाया जा रहा है। इसमें डिजिटल ऊंचाई मॉडल का प्रयोग भी किया जाएगा।
मजबूत पहाड़ों को किया जाएगा मार्क
उत्तर रेलवे की टीम के साथ यूक्सेल तर्की के जियोलॉजिस्ट और अलाइनमेंट इंजीनियर भी सर्वे के लिए लेह पहुंचे हैं। टीम में मौजूद जियोलॉजिस्ट ऐसे पहाड़ों को मार्क करेंगे जो मजबूत हों ताकि उन पर बनाई गईं सुरंगें और ब्रिज सुरक्षित ढंग से बनाए जा सकें। जियोलॉजिकल मैपिंग के लिए 1:50 थाउजेंड स्केल की जगह उस प्रोजेक्ट में 1:5 थाउजेंड स्केल से मैप तैयार किया जा रहा है।
इन वादियों से गुजरेगी रेल
बिलासपुर से शुरू होने वाला सफर मनाली, तांडी, दरचा, बरलाच-ला, सरचू, लछुलंग-ला, डेबरिंग, तंगलंगला, उपशी से होते हुए पर्यटक लेह पहुंचेंगे। सुंदर पहाड़ों और बर्फ से ढकी वादियों के बीच हसीन सफर के साथ यह यात्रा पर्यटकों के लिए रोमांच से भरी रहेगी।
टीम ने इस दौरे में 18 अक्तूबर की शाम तक उपशी से सरचू तक का रिफाइन अलाइनमेंट सर्वे पूरा कर लिया है। यह अंतिम सर्वे है। इसके बाद प्रोजेक्ट की फाइनल लागत रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। इस दौरान आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञ, यूक्सेल तर्की के जियोलॉजिस्ट और अलाइनमेंट इंजीनियर खुशबू ने बेहतर तरीके से रिपोर्ट तैयार की है।
- हरपाल सिंह, परियोजना निदेशक