हिमाचल में सरकारी कामकाज पर एक वरिष्ठ अधिकारी की सियासत भारी पड़ रही है। सीएम कार्यालय के आला अफसरों के खिलाफ भी इस अतिरिक्त मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यधारा में आने के लिए ही उक्त अधिकारी छटपटा रहे हैं। निरंकुश हुए इन अधिकारी के अंदरूनी दखल की वजह से सरकारी कामकाज तक प्रभावित हो रहा है।
जयराम सरकार पहले से ही अफसरशाही पर अंकुश न होने के विपक्ष के आरोपों से घिरती रही है। सीएम बेशक अफसरों को बार-बार चेतावनी दे रहे हैं कि वे कामकाज पर फोकस करें, लेकिन अधिकारियों के इस शीतयुद्ध का सरकार के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों में मुख्यमंत्री कार्यालय के कुछ अधिकारियों और खुद को उपेक्षित मान रहे इन बड़े अधिकारी के बीच शीतयुद्ध चल रहा है।
सूत्रों के अनुसार यह अधिकारी मुख्यमंत्री कार्यालय में पहले अपनी नियुक्ति चाह रहे थे। यही नहीं, मुख्यधारा के कुछ महकमे भी यही चाह रहे थे, लेकिन अपनी कहीं भी चलती न देखते इन बड़े अधिकारी ने सीएम कार्यालय के अफसरों के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है।
पहले भी एक निगम की संपत्ति बेचने की साजिश के लग चुके आरोप
सरकार की मुश्किलें बढ़ा रहे इन अधिकारी पर निगम की संपत्ति बेचने के पहले भी आरोप लग चुके हैं। यह मुद्दा बड़ा छाया रहा था। बाद में वह सफाई देते रह गए थे। कई अन्य मामलों में भी यह अफसर विवादित रहे हैं।
सीएम ने निकम्मे अफसरों पर कार्रवाई की बात की
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी निकम्मे अफसरों पर कार्रवाई की बात कही है। उनका कहना है कि अगले दो साल केवल और केवल काम ही करेंगे, लेकिन अधिकारियों में चल रही धींगामुश्ती सीएम के इस अभियान को बाधित कर सकती है।