तिब्बत महज एक राजनीतिक मसला नहीं है बल्कि यह सत्य से जुड़ा हुआ प्रश्न है। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने यह बात अपने जन्म दिवस के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि एक समय पर तिब्बत का प्रश्न इंद्रधनुष के समान विलुप्त होता हुआ दिखाई दे रहा था। उस समय तिब्बती शिक्षा देने के लिए स्कूल खोले गए और मठों की नए सिरे से स्थापना की गई। उसी का परिणाम है कि आज निर्वासन में भी तिब्बत की संस्कृति, धर्म और भाषा जीवंत बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी कांग्रेस की पहली यात्रा के दौरान एक व्यक्ति ने मुझसे कहा कि एक तरफ चीन के लाखों सैनिक हैं और दूसरी तरफ अकेले दलाई लामा। इसके बावजूद चीनी सेना उन्हें परास्त नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण यह है कि हमने कभी झूठ नहीं कहा। सत्य हमेशा हमारे पक्ष में खड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश के नाजुक वक्त में भी आप सबने मुस्कान भरे लहजों के साथ जन्मदिन की शुभकामनाएं दी हैं, इसके लिए मैं आपका हार्दिक आभार जताता हूं।