आधी रात का वक्त था। मनाली से कटड़ा जा रही बस में ड्राइवर-कंडक्टर समेत करीब 12 से 13 यात्री सवार थे। बस की बत्ती बंद थी और मुसाफिर गहरी नींद में। पधर के आगे कोटरोपी में बस अचानक रुक गई। कुछ लोग बाहर निकल गए और कुछ बस में सोते रहे।
बस रुके कुछ ही मिनट हुए थे कि जोरदार धमाका हुआ। कुछ समझ पाते, उससे पहले ही बस के तमाम शीशे टूट गए और मलबा बस में घुस गया। मदद के लिए चीख पुकार मच गई।
लेकिन अंधेरा और भूस्खलन के डर से कोई मदद की हिम्मत नहीं जुटा पाया। यह आपबीती अमर उजाला को चार सहेलियों ने सुनाई।
बस में बुरी तरह फंस गई थी ब्यूटी
शिमला के एक निजी नर्सिंग कॉलेज में पढ़ने वाली मंजू कुमारी निवासी शिल्ह तहसील करसोग, ब्यूटी कुमारी निवासी कृष्णानगर शिमला, अनिता कुमारी निवासी जोगिंद्रनगर और रामपुर की सचमित्रा अनिता के घर जा रही थीं। मंजू और सुमित्रा ने बताया कि मनाली-कटड़ा बस में वे सभी मंडी से सवार हुई थीं।
इन्होंने बताया कि सचमित्रा के सिर पर हल्की चोट आई। सुमित्रा ने सबसे पहले मंजू को निकाला जबकि अनिता ब्यूटी को निकाल रही थी। ब्यूटी बस में बुरी तरह फंस गई थी। उसके बाद तीन सहेलियां ब्यूटी को बस से निकालने के लिए लगभग आधा घंटे से भी ज्यादा समय तक संघर्ष करती रही।
खिड़की से कूदकर बचाई जान
जैसे तैसे सभी बाहर निकलीं, जिसके बाद चारों को मंडी अस्पताल पहुंचाया गया। यहां से मंजू और ब्यूटी को आईजीएमसी शिमला रेफर किया गया है जबकि अनिता और सचमित्रा को छुट्टी दे दी गई है।
पठानकोट के भुंगल बदानी गांव के शुभम ने बताया कि वह मंडी से मनाली-कटड़ा रूट की बस से पठानकोट के लिए रवाना हुआ। कोटरोपी में बस रुकी लेकिन उसे नींद आ रही थी इसलिए नहीं उतरा।
शुभम ने बताया कि अचानक एक जोरदार धमाका हुआ और बस हिलने लगी। नींद खुली तो वह सहम गया। खिड़की की सीट पर होने के कारण वह कूद गया, जिससे जान बच गई।
चार में से तीन घायलों का होना है ऑपरेशन
मंडी में पहाड़ दरकने से बस हादसे में घायल चार छात्राओं को आईजीएमसी लाया गया है। शिमला स्थित अन्नाडेल नर्सिंग कॉलेज से यह छात्राएं बीएससी कर रही है। शाम पांच बजे घायल आईजीएमसी पहुंची है। डॉक्टरों ने घायलों की हालत देखने के बाद से रामपुर की सुचित्रा (20), करसोग की मंजू (20) और बिहार की ब्यूटी (18) की टांग को इमरजेंसी ऑपरेशन करने की बात कही है।
वहीं जोंगिंद्रनगर की अनीता (23) की बायीं बाजू पर चोटें आई है। हादसे में घायल अनीता ने देर शाम मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि घटना रात साढ़े से पौने एक बजे के करीब की है। चालक ने बस को एक जगह रोका और यात्रियों से फ्रेश होने की बात कही। इसी बीच अचानक दूसरी ओर पहाड़ी से पत्थर दरकने लगे थे।
चालक को इस बात का आभास हुआ और उसने बस में सवार सभी यात्रियों को सचेत कर बस में बैठने की सलाह दी। कहा कि मैं बस पीछे ले जा रहा हूं। लड़की ने बताया कि जैसे ही सभी सवारियां बस में चढ़ी, अचानक से पहाड़ी दरक गई और देखते ही देखते मलबे के भीतर बस फंस गई।
अनीता कहती है कि उसके हाथ में फोन था। आपातकालीन नंबर पर फोन करके हादसे की सूचना दी। करीब डेढ़ घंटे के बाद बचाव कर्मी मौके पर पहुंचे। उसके बाद ही बस में सवार सभी लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। जबकि उसकी दो सहेलिया मंजू और सुचित्रा को बस की एंगल काटकर बाहर निकाला गया।
सितंबर में है पेपर
हादसे में चारों छात्राएं दर्द से करहा भी रही थी, और साथ मौजूद परिजनों से कह भी रही थी अगले माह हमारी परीक्षा है। अब हम कैसे परीक्षा देंगी। इस पर वहां मौजूद घायलों के परिजन उन्हें दिलासा देते नजर आए।