स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि सूबे में चिकित्सा पर्यटन सुविधाएं विकसित करने के लिए अलग से योजना बनाने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में न्यूनतम लागत पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं, जिसके चलते हिमाचल के चिकित्सा पर्यटन के अनुकूल गंतव्य के तौर पर उभरने की सारी संभावनाएं हैं।
कौल सिंह ने शुक्रवार को डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय टांडा की रोगी कल्याण समिति की गवर्निंग परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान परिवहन मंत्री जीएस बाली भी उपस्थित रहे। बैठक में समिति के वर्ष 2017-18 के लिए अनुमानित 29.50 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति दी गई।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में पैरा मेडिकल स्टाफ के 2000 पद भरने का निर्णय लिया है। उन्होंने टांडा अस्पताल प्रबंधन को संस्थान में 10 वर्षों से अधिक अवधि से विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रहे कर्मियों के नियमितीकरण के मामले को अविलंब भेजने को कहा, ताकि उन्हें मंजूरी के लिए केबिनेट में लाया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार टांडा अस्पताल को सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने पर बल दे रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्टाफ के आवासों, अस्पताल के वार्डों की शीघ्र मरम्मत करने के निर्देश दिए। बैठक में परिवहन मंत्री और स्थानीय विधायक जीएस बाली ने कहा कि प्रदेश सरकार टांडा कॉलेज को उत्तर भारत का सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थान बनाने के लिए प्रयासरत है।
बैठक में अस्पताल परिसर में रखरखाव से जुड़े विभिन्न कार्यों के लिए आउटसोर्स पर दो पलंबर, एक कारपेंटर, एक सफाई कर्मी एवं एक वर्ष की अवधि के लिए अस्पताल के गेस्ट हाउस में दो पद कुक और दो पद हेल्पर के भरने की मंजूरी दी गई। बैठक में प्राचार्य डॉ. रमेश भारती, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. युक्तिधर शर्मा, अतिरिक्त उपायुक्त कांगड़ा केके सरोच सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे।
छह नए वेंटिलेटर खरीदने को मंजूरी
आरकेएस की बैठक में टांडा अस्पताल में छह नए वेंटिलेटर खरीदने की भी अनुमति प्रदान की गई। बैठक में कहा गया कि टांडा में आरकेएस की गवर्निंग समिति ने इस वर्ष बजट में विभिन्न योजनाओं के तहत गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों के निशुल्क उपचार और दवाइयों के लिए 11.55 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है।
जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिला और एक साल तक के शिशु को मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए 3.90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा मिशन के तहत बच्चों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा के लिए 50 लाख रुपये बजट का प्रावधान किया गया है।