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हिमाचल में ललित और निष्पादन कला पुरस्कारों की घोषणा, यहां जानें

Wed, 10 Feb 2021 10:02 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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एसडी कश्यप, संजय सूद, खिमी राम और डॉ. नंद लाल ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी ने सम्मान चयन समिति की स्वीकृति और मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद वर्ष 2017 और 2018 के लिए ललित कला और निष्पादन कला सम्मान घोषित कर दिए हैं। भाषा कला एवं संस्कृति मंत्री गोविंद ठाकुर ने बताया कि पुरस्कार इसी वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री प्रदान करेंगे। हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के सचिव डॉ. कर्म सिंह ने कहा कि प्रत्येक कला सम्मान में 51 हजार रुपये की राशि तथा सम्मान चिह्न और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। डॉ. नंद लाल ठाकुर को चित्रकला में वर्ष 2017 का ललित कला सम्मान, 2018 का ललित कला सम्मान खिमी राम को पारंपरिक शिल्प कला में उनके विशिष्ट योगदान के लिए दिया गया है।  निष्पादन कला सम्मान 2017 के लिए संजय सूद और वर्ष 2018 के लिए एसडी कश्यप को चुना गया है। 

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संजय सूद का रंगमंच कलाकार एवं नाट्य निर्देशन के क्षेत्र में विशेष योगदान रहा है। इन्होंने आगरा बाजार, खामोश अदालत जारी है, गोदान, होली, आषाढ़ का एक दिन, बैरी, राजा का बाजा, सैंया भये कोतवाल, खड़िया का घेरा, मारीच ये संवाद, एल्डरी सन, पंछी ऐसे आते हैं आदि लगभग 35 नाटकों में अभिनय किया है। नाट्य निर्देशन में संजय सूद के रंग नगरी, बहुत बड़ा सवाल, समरथ को नहीं दोष गोसाईं, पेपर वेट, बड़े भाई साहब, मोक डॉक्टर आदि नाटक उल्लेखनीय हैं। हिंदी फिल्मों और स्वास्तिक कन्नड़ फिल्म में भी दमदार अभिनय किया है।  डॉ. नंद लाल ठाकुर धामी शिमला के निवासी और ललित कला के प्रसिद्ध कलाकार हैं। एमबीए पेंटिंग (गोल्ड मेडलिस्ट) एमए इतिहास तथा विजुअल आर्ट में पीएचडी हैं।

वर्तमान में राष्ट्रीय ललित कला अकादमी दिल्ली की सामान्य परिषद में हिमाचल के प्रतिनिधि सदस्य हैं। वर्ष 2018 का निष्पादन कला सम्मान पाने वाले एसडी कश्यप प्रख्यात गायक, संगीतकार एवं संगीत निर्देशक हैं। वर्ष 1970 में सरकारी नौकरी छोड़कर 70 के दशक में मुंबई में रहकर फिल्मों और धारावाहिकों से संगीतकार के रूप में ख्याति पाई। पहले जिला मंडी के सकरोह फिर पनारसा में रिकार्डिंग स्टूडियो स्थापित कर लोक गीतों की कैसेट और सीडी का निर्माण कर फिल्मी संगीतकार के रूप में छाप छोड़ी। लगभग 4000 से अधिक गीत रिकॉर्ड कर संगीतबद्ध किए हैं। 1000 गीत स्वयं लिखे हैं। वर्ष 2018 का ललित कला सम्मान कुल्लू के पुरानी मनाली के खिमी राम को पारंपरिक शिल्पकला में उनके विशिष्ट योगदान के लिए दिया है। इनके पारंपरिक मुखौटे, धातु मोहरे और वाद्य यंत्रों का निर्माण किया जा रहा है। 

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