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हिमाचल के बागवानों को इटली की इस सेब किस्म का बेसब्री से इंतजार

Mon, 29 Jan 2018 09:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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प्रदेश के बागवानों को इटली की नई सेब किस्म का बेसब्री से इंतजार है। इटली की दो किस्मों जेरोमाइन और रेड विलोक्स को परख लेने के बाद अब सेब की आधुनिक विदेशी किस्म किंग रोट को हासिल करने के लिए बागवान उतावले हैं। 

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इसे बागवानी विकास परियोजना के तहत इटली से मंगवाने का विचार चल रहा है। कुछ बागवान इसे अपने स्तर पर भी मंगवाने में लगे हैं। किंग रॉट रेड डिलिशियस वैराइटी है। ये सेमी स्पर किस्म है। जैसे कि रेड विलोक्स और जेरोमाइन सेमी स्पर किस्में हैं। 

इनकी ग्रोथ स्पर किस्मों से ज्यादा होती है। सेब बागवानों ने अभी से विदेशों से सेब के पौधे मंगवाने वाले दूसरे बागवानों से इस नई किस्म कलमों के लिए संपर्क साधने शुरू कर दिए हैं। करीब पांच साल पहले इटली से हिमाचल में पहुंची जेरोमाइन किस्म का बागवान बेहतरीन प्रदर्शन देख चुके हैं। 
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ये किस्म शुरू से ही लाल रहती है। इसमें कलर स्प्रे करने की जरूरत नहीं पड़ती। मार्केट में भी लाल सेब की ज्यादा मांग रहती हैं। प्रदेश में 4000 से 6000 फुट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब की परंपरागत रेड डिलिशियस किस्म रॉयल में पूरा रंग नहीं आता है।

ये फसल भी देरी से देती है। हिमाचल के जेरोमाइन और रेड विलोक्स में 4000 से 6000 फुट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी अच्छा प्राकृतिक रंग आ जाता है। इसे रेट भी अच्छे मिल रहे हैं। 

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इटली में भी किंग रोट के बगीचे देखकर लौटे बागवान 

इटली के बोलजानो में सेब के बगीचे देखकर लौटे बागवान कुनाल सिंह चौहान कहते हैं कि उन्होंने वहां पर सबसे ज्यादा रेड विलोक्स के बगीचे देखे हैं। एम 9 रूट स्टॉक किस्म पर दस-दस फुट तक के  पौधे देखे हैं। एक पेड़ में 18-18 किलो सेब होता है।

जेरोमाइन के भी कुछ बगीचे हैं। किंग रॉट को भी हाल ही में उगाना शुरू किया गया है। इसके बगीचे भी ज्यादा नहीं हैं। चौहान ने कहा कि हिमाचल के बागवान नई किस्म के पीछे ज्यादा भागते हैं। इसलिए किंग रॉट का भी क्रेज है।

ये सब सेमी स्पर किस्में हैं। फल एक जैसे ही लगते हैं। कुनाल बोले वे अपने उन्नतशील उत्पादक संघ के माध्यम से अपनी तकनीक का विस्तार बागवानों के बीच करते रहते हैं।   

विश्वविद्यालय से चर्चा के बाद ही मंगवाएंगे : डा. शर्मा 
हिमाचल प्रदेश की बागवानी विकास परियोजना के परामर्शक डॉ. एचआर शर्मा का कहना है कि किंग रोट किस्म को मंगवाने पर अभी महज चर्चा ही हुई है। अभी इसे मंगवाने की प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। जहां तक किसी भी वैराइटी का प्रश्न है तो हम विदेशों से वही किस्में मंगवा रहे हैं जिसकी बागवानी विश्वविद्यालय संस्तुति करेगा और जो हिमाचल के लिए उपयुक्त होेंगी। इस पर जो कुछ भी होना है उसमें विश्व बैंक और विश्वविद्यालय की सहमति जरूरी है। 
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